20 अक्टूबर 2028 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (02:02, 21 अक्टू॰ तक), नक्षत्र विशाखा (15:28 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 10:23 से 12:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 18:32
रात 05:29 तक
तिथि
तृतीया, 02:02 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
विशाखा, 15:28 तक
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 02:02, 21 अक्टू॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 00:18, 22 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 15:28 तक
अनुराधा 14:06, 21 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 20:56 तक
सौभाग्य 18:13, 21 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 15:11 तक
गर 02:02, 21 अक्टू॰ तक
वणिज 13:04, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 09:54 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
06:37
चंद्रास्त
21:14
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:23 – 12:01
यमगंड
15:16 – 16:54
गुलिक काल
07:08 – 08:46

20 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:31 – 07:08सामान्य
लाभ07:08 – 08:46शुभ
अमृत08:46 – 10:23शुभ
काल10:23 – 12:01टालें
शुभ12:01 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 15:16टालें
उद्वेग15:16 – 16:54टालें
चर16:54 – 18:32सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:32 – 19:54टालें
काल19:54 – 21:16टालें
लाभ21:16 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:01टालें
शुभ00:01 – 01:23शुभ
अमृत01:23 – 02:45शुभ
चर02:45 – 04:07सामान्य
रोग04:07 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3106:36दिन
बुध06:3607:41दिन
चंद्र07:4108:46दिन
शनि08:4609:51दिन
गुरु09:5110:56दिन
मंगल10:5612:01दिन
सूर्य12:0113:06दिन
शुक्र13:0614:11दिन
बुध14:1115:16दिन
चंद्र15:1616:21दिन
शनि16:2117:27दिन
गुरु17:2718:32दिन
मंगल18:3219:26रात
सूर्य19:2620:21रात
शुक्र20:2121:16रात
बुध21:1622:11रात
चंद्र22:1123:06रात
शनि23:0600:01रात
गुरु00:0100:55रात
मंगल00:5501:50रात
सूर्य01:5002:45रात
शुक्र02:4503:40रात
बुध03:4004:35रात
चंद्र04:3505:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2594° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।