4 फ़रवरी 2029 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 4 फ़रवरी 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 4 फ़रवरी 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (20:53 तक), नक्षत्र चित्रा (01:49, 5 फ़र॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 17:34 से 19:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 19:15
रात 05:45 तक
तिथि
षष्ठी, 20:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
चित्रा, 01:49 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 20:53 तक
कृष्ण सप्तमी 18:45, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 01:49, 5 फ़र॰ तक
स्वाति 00:30, 6 फ़र॰ तक
योग
धृति 07:11 तक
शूलअशुभ 04:01, 5 फ़र॰ तक
गंडअशुभ 01:12, 6 फ़र॰ तक
करण
गर 10:06 तक
वणिज 20:53 तक
विष्टि (भद्रा) 07:46, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 14:39 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
22:16
चंद्रास्त
11:05
दिनमान
13h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
17:34 – 19:15
यमगंड
12:30 – 14:11
गुलिक काल
15:53 – 17:34

4 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:44 – 07:25टालें
चर07:25 – 09:07सामान्य
लाभ09:07 – 10:48शुभ
अमृत10:48 – 12:30शुभ
काल12:30 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:53शुभ
रोग15:53 – 17:34टालें
उद्वेग17:34 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:15 – 20:34शुभ
अमृत20:34 – 21:53शुभ
चर21:53 – 23:11सामान्य
रोग23:11 – 00:30टालें
काल00:30 – 01:49टालें
लाभ01:49 – 03:07शुभ
उद्वेग03:07 – 04:26टालें
शुभ04:26 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4406:52दिन
शुक्र06:5207:59दिन
बुध07:5909:07दिन
चंद्र09:0710:14दिन
शनि10:1411:22दिन
गुरु11:2212:30दिन
मंगल12:3013:37दिन
सूर्य13:3714:45दिन
शुक्र14:4515:53दिन
बुध15:5317:00दिन
चंद्र17:0018:08दिन
शनि18:0819:15दिन
गुरु19:1520:08रात
मंगल20:0821:00रात
सूर्य21:0021:53रात
शुक्र21:5322:45रात
बुध22:4523:38रात
चंद्र23:3800:30रात
शनि00:3001:23रात
गुरु01:2302:15रात
मंगल02:1503:07रात
सूर्य03:0704:00रात
शुक्र04:0004:52रात
बुध04:5205:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2635° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।