27 फ़रवरी 2029 को पर्थ का पंचांग

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (07:35 तक), नक्षत्र आश्लेषा (23:17 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 15:41 से 17:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:53
रात 06:05 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:35 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
आश्लेषा, 23:17 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 07:35 तक
शुक्ल चतुर्दशी 04:35, 28 फ़र॰ तक
पूर्णिमा 01:10, 1 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 20:43, 28 फ़र॰ तक
योग
शोभन 10:29 तक
अतिगंडअशुभ 06:47, 28 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 07:35 तक
गर 18:08 तक
वणिज 04:35, 28 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:55, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 23:17 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
17:45
चंद्रास्त
04:07
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
15:41 – 17:17
यमगंड
09:16 – 10:52
गुलिक काल
12:28 – 14:05

27 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:04 – 07:40टालें
उद्वेग07:40 – 09:16टालें
चर09:16 – 10:52सामान्य
लाभ10:52 – 12:28शुभ
अमृत12:28 – 14:05शुभ
काल14:05 – 15:41टालें
शुभ15:41 – 17:17शुभ
रोग17:17 – 18:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:53 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:41शुभ
उद्वेग21:41 – 23:05टालें
शुभ23:05 – 00:29शुभ
अमृत00:29 – 01:53शुभ
चर01:53 – 03:17सामान्य
रोग03:17 – 04:41टालें
काल04:41 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0407:08दिन
सूर्य07:0808:12दिन
शुक्र08:1209:16दिन
बुध09:1610:20दिन
चंद्र10:2011:24दिन
शनि11:2412:28दिन
गुरु12:2813:33दिन
मंगल13:3314:37दिन
सूर्य14:3715:41दिन
शुक्र15:4116:45दिन
बुध16:4517:49दिन
चंद्र17:4918:53दिन
शनि18:5319:49रात
गुरु19:4920:45रात
मंगल20:4521:41रात
सूर्य21:4122:37रात
शुक्र22:3723:33रात
बुध23:3300:29रात
चंद्र00:2901:25रात
शनि01:2502:21रात
गुरु02:2103:17रात
मंगल03:1704:13रात
सूर्य04:1305:09रात
शुक्र05:0906:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2644° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।