20 सितंबर 2029 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 20 सितंबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 20 सितंबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (21:27 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (15:48 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 13:40 से 15:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:11
रात 06:07 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:27 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 15:48 तक
शतभिषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 21:27 तक
शुक्ल चतुर्दशी 22:48, 21 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 17:40, 21 सित॰ तक
योग
धृति 03:41, 21 सित॰ तक
शूलअशुभ 03:46, 22 सित॰ तक
करण
कौलव 08:55 तक
तैतिल 21:27 तक
गर 10:05, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
16:07
चंद्रास्त
04:27
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
13:40 – 15:10
यमगंड
06:08 – 07:39
गुलिक काल
09:09 – 10:39

20 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:39शुभ
रोग07:39 – 09:09टालें
उद्वेग09:09 – 10:39टालें
चर10:39 – 12:10सामान्य
लाभ12:10 – 13:40शुभ
अमृत13:40 – 15:10शुभ
काल15:10 – 16:41टालें
शुभ16:41 – 18:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:11 – 19:41शुभ
चर19:41 – 21:10सामान्य
रोग21:10 – 22:40टालें
काल22:40 – 00:09टालें
लाभ00:09 – 01:39शुभ
उद्वेग01:39 – 03:08टालें
शुभ03:08 – 04:38शुभ
अमृत04:38 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:09दिन
मंगल07:0908:09दिन
सूर्य08:0909:09दिन
शुक्र09:0910:09दिन
बुध10:0911:10दिन
चंद्र11:1012:10दिन
शनि12:1013:10दिन
गुरु13:1014:10दिन
मंगल14:1015:10दिन
सूर्य15:1016:11दिन
शुक्र16:1117:11दिन
बुध17:1118:11दिन
चंद्र18:1119:11रात
शनि19:1120:10रात
गुरु20:1021:10रात
मंगल21:1022:10रात
सूर्य22:1023:09रात
शुक्र23:0900:09रात
बुध00:0901:09रात
चंद्र01:0902:08रात
शनि02:0803:08रात
गुरु03:0804:08रात
मंगल04:0805:07रात
सूर्य05:0706:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2722° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।