11 अक्टूबर 2029 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (13:06 तक), नक्षत्र अनुराधा (20:59 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 13:38 से 15:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 18:25
रात 05:40 तक
तिथि
चतुर्थी, 13:06 तक
पंचमी
नक्षत्र
अनुराधा, 20:59 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 13:06 तक
शुक्ल पंचमी 10:34, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 19:26, 12 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 19:36 तक
सौभाग्य 16:32, 12 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:06 तक
बव 23:46 तक
बालव 10:34, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
07:59
चंद्रास्त
22:37
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
13:38 – 15:14
यमगंड
05:41 – 07:17
गुलिक काल
08:52 – 10:28

11 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:41 – 07:17शुभ
रोग07:17 – 08:52टालें
उद्वेग08:52 – 10:28टालें
चर10:28 – 12:03सामान्य
लाभ12:03 – 13:38शुभ
अमृत13:38 – 15:14शुभ
काल15:14 – 16:49टालें
शुभ16:49 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:25 – 19:49शुभ
चर19:49 – 21:14सामान्य
रोग21:14 – 22:38टालें
काल22:38 – 00:02टालें
लाभ00:02 – 01:27शुभ
उद्वेग01:27 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:16शुभ
अमृत04:16 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4106:45दिन
मंगल06:4507:49दिन
सूर्य07:4908:52दिन
शुक्र08:5209:56दिन
बुध09:5610:59दिन
चंद्र10:5912:03दिन
शनि12:0313:07दिन
गुरु13:0714:10दिन
मंगल14:1015:14दिन
सूर्य15:1416:18दिन
शुक्र16:1817:21दिन
बुध17:2118:25दिन
चंद्र18:2519:21रात
शनि19:2120:17रात
गुरु20:1721:14रात
मंगल21:1422:10रात
सूर्य22:1023:06रात
शुक्र23:0600:02रात
बुध00:0200:59रात
चंद्र00:5901:55रात
शनि01:5502:51रात
गुरु02:5103:48रात
मंगल03:4804:44रात
सूर्य04:4405:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2730° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।