31 अक्टूबर 2029 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 31 अक्टूबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 31 अक्टूबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:24 तक), नक्षत्र आश्लेषा (02:07, 1 नव॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:20 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 12:00 से 13:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:20 – 18:40
रात 05:19 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 02:07 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:24 तक
कृष्ण नवमी 06:33, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 02:07, 1 नव॰ तक
मघा 01:17, 2 नव॰ तक
योग
शुभ 13:25 तक
शुक्ल 11:24, 1 नव॰ तक
करण
कौलव 07:24 तक
तैतिल 19:05 तक
गर 06:33, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 02:07, 1 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:20
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
01:03
चंद्रास्त
12:17
दिनमान
13h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:00 – 13:40
यमगंड
07:00 – 08:40
गुलिक काल
10:20 – 12:00

31 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:20 – 07:00शुभ
अमृत07:00 – 08:40शुभ
काल08:40 – 10:20टालें
शुभ10:20 – 12:00शुभ
रोग12:00 – 13:40टालें
उद्वेग13:40 – 15:20टालें
चर15:20 – 17:00सामान्य
लाभ17:00 – 18:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:40 – 20:00टालें
शुभ20:00 – 21:20शुभ
अमृत21:20 – 22:40शुभ
चर22:40 – 23:59सामान्य
रोग23:59 – 01:19टालें
काल01:19 – 02:39टालें
लाभ02:39 – 03:59शुभ
उद्वेग03:59 – 05:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2006:26दिन
चंद्र06:2607:33दिन
शनि07:3308:40दिन
गुरु08:4009:46दिन
मंगल09:4610:53दिन
सूर्य10:5312:00दिन
शुक्र12:0013:07दिन
बुध13:0714:13दिन
चंद्र14:1315:20दिन
शनि15:2016:27दिन
गुरु16:2717:34दिन
मंगल17:3418:40दिन
सूर्य18:4019:33रात
शुक्र19:3320:27रात
बुध20:2721:20रात
चंद्र21:2022:13रात
शनि22:1323:06रात
गुरु23:0623:59रात
मंगल23:5900:53रात
सूर्य00:5301:46रात
शुक्र01:4602:39रात
बुध02:3903:32रात
चंद्र03:3204:25रात
शनि04:2505:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2738° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।