6 जुलाई 2027 को पुणे का पंचांग

मंगलवार, 6 जुलाई 2027, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 6 जुलाई 2027 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (21:49 तक), नक्षत्र पुष्य (06:34 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 15:57 से 17:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 19:15
रात 06:03 तक
तिथि
तृतीया, 21:49 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
आश्लेषा, 04:03 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जुलाई 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 21:49 तक
शुक्ल चतुर्थी 18:44, 7 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 06:34 तक
आश्लेषा 04:03, 7 जुल॰ तक
मघा 01:56, 8 जुल॰ तक
योग
हर्षण 07:15 तक
वज्रअशुभ 03:27, 7 जुल॰ तक
सिद्धि 23:58, 7 जुल॰ तक
करण
तैतिल 11:29 तक
गर 21:49 तक
वणिज 08:13, 7 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 04:03, 7 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
08:13
चंद्रास्त
21:24
दिनमान
13h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
15:57 – 17:36
यमगंड
09:21 – 11:00
गुलिक काल
12:39 – 14:18

6 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:03 – 07:42टालें
उद्वेग07:42 – 09:21टालें
चर09:21 – 11:00सामान्य
लाभ11:00 – 12:39शुभ
अमृत12:39 – 14:18शुभ
काल14:18 – 15:57टालें
शुभ15:57 – 17:36शुभ
रोग17:36 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:15 – 20:36टालें
लाभ20:36 – 21:57शुभ
उद्वेग21:57 – 23:18टालें
शुभ23:18 – 00:39शुभ
अमृत00:39 – 02:00शुभ
चर02:00 – 03:21सामान्य
रोग03:21 – 04:42टालें
काल04:42 – 06:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0307:09दिन
सूर्य07:0908:15दिन
शुक्र08:1509:21दिन
बुध09:2110:27दिन
चंद्र10:2711:33दिन
शनि11:3312:39दिन
गुरु12:3913:45दिन
मंगल13:4514:51दिन
सूर्य14:5115:57दिन
शुक्र15:5717:03दिन
बुध17:0318:09दिन
चंद्र18:0919:15दिन
शनि19:1520:09रात
गुरु20:0921:03रात
मंगल21:0321:57रात
सूर्य21:5722:51रात
शुक्र22:5123:45रात
बुध23:4500:39रात
चंद्र00:3901:33रात
शनि01:3302:27रात
गुरु02:2703:21रात
मंगल03:2104:15रात
सूर्य04:1505:09रात
शुक्र05:0906:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2413° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।