22 जुलाई 2028 को पुणे का पंचांग

शनिवार, 22 जुलाई 2028, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 22 जुलाई 2028 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:31 तक), नक्षत्र पुष्य (02:35, 23 जुल॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 09:24 से 11:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 19:12
रात 06:09 तक
तिथि
प्रतिपदा, 05:26 तक
नक्षत्र
पुष्य, 02:35 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जुलाई 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 08:31 तक
शुक्ल प्रतिपदा 05:26, 23 जुल॰ तक
शुक्ल द्वितीया 02:10, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 02:35, 23 जुल॰ तक
आश्लेषा 00:10, 24 जुल॰ तक
योग
वज्रअशुभ 22:03 तक
सिद्धि 18:21, 23 जुल॰ तक
करण
नाग 08:31 तक
किंस्तुघ्न 19:00 तक
बव 05:26, 23 जुल॰ तक
बालव 15:49, 23 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
06:07
चंद्रास्त
19:29
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
09:24 – 11:02
यमगंड
14:18 – 15:56
गुलिक काल
06:08 – 07:46

22 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:08 – 07:46टालें
शुभ07:46 – 09:24शुभ
रोग09:24 – 11:02टालें
उद्वेग11:02 – 12:40टालें
चर12:40 – 14:18सामान्य
लाभ14:18 – 15:56शुभ
अमृत15:56 – 17:34शुभ
काल17:34 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:12 – 20:35शुभ
उद्वेग20:35 – 21:57टालें
शुभ21:57 – 23:19शुभ
अमृत23:19 – 00:41शुभ
चर00:41 – 02:03सामान्य
रोग02:03 – 03:25टालें
काल03:25 – 04:47टालें
लाभ04:47 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0807:14दिन
गुरु07:1408:19दिन
मंगल08:1909:24दिन
सूर्य09:2410:30दिन
शुक्र10:3011:35दिन
बुध11:3512:40दिन
चंद्र12:4013:46दिन
शनि13:4614:51दिन
गुरु14:5115:56दिन
मंगल15:5617:02दिन
सूर्य17:0218:07दिन
शुक्र18:0719:12दिन
बुध19:1220:07रात
चंद्र20:0721:02रात
शनि21:0221:57रात
गुरु21:5722:51रात
मंगल22:5123:46रात
सूर्य23:4600:41रात
शुक्र00:4101:35रात
बुध01:3502:30रात
चंद्र02:3003:25रात
शनि03:2504:19रात
गुरु04:1905:14रात
मंगल05:1406:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2560° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।