23 जुलाई 2028 को पुणे का पंचांग

रविवार, 23 जुलाई 2028, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 जुलाई 2028 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (02:10, 24 जुल॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (00:10, 24 जुल॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 17:34 से 19:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 19:12
रात 06:09 तक
तिथि
द्वितीया, 02:10 तक
तृतीया
नक्षत्र
आश्लेषा, 00:10 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:10, 24 जुल॰ तक
शुक्ल तृतीया 22:53, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 00:10, 24 जुल॰ तक
मघा 21:41, 24 जुल॰ तक
योग
सिद्धि 18:21 तक
व्यतीपातअशुभ 14:34, 24 जुल॰ तक
करण
बालव 15:49 तक
कौलव 02:10, 24 जुल॰ तक
तैतिल 12:31, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 00:10, 24 जुल॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
07:12
चंद्रास्त
20:15
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
17:34 – 19:12
यमगंड
12:41 – 14:18
गुलिक काल
15:56 – 17:34

23 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:09 – 07:47टालें
चर07:47 – 09:25सामान्य
लाभ09:25 – 11:03शुभ
अमृत11:03 – 12:41शुभ
काल12:41 – 14:18टालें
शुभ14:18 – 15:56शुभ
रोग15:56 – 17:34टालें
उद्वेग17:34 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:12 – 20:34शुभ
अमृत20:34 – 21:56शुभ
चर21:56 – 23:19सामान्य
रोग23:19 – 00:41टालें
काल00:41 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:25शुभ
उद्वेग03:25 – 04:47टालें
शुभ04:47 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0907:14दिन
शुक्र07:1408:19दिन
बुध08:1909:25दिन
चंद्र09:2510:30दिन
शनि10:3011:35दिन
गुरु11:3512:41दिन
मंगल12:4113:46दिन
सूर्य13:4614:51दिन
शुक्र14:5115:56दिन
बुध15:5617:02दिन
चंद्र17:0218:07दिन
शनि18:0719:12दिन
गुरु19:1220:07रात
मंगल20:0721:02रात
सूर्य21:0221:56रात
शुक्र21:5622:51रात
बुध22:5123:46रात
चंद्र23:4600:41रात
शनि00:4101:35रात
गुरु01:3502:30रात
मंगल02:3003:25रात
सूर्य03:2504:20रात
शुक्र04:2005:14रात
बुध05:1406:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2560° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।