31 दिसंबर 2029 को पुणे का पंचांग

सोमवार, 31 दिसंबर 2029, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 31 दिसंबर 2029 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (19:12 तक), नक्षत्र विशाखा (04:10, 1 जन॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:06 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 08:29 से 09:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:06 – 18:08
रात 07:06 तक
तिथि
एकादशी, 19:12 तक
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा, 04:10 तक
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 19:12 तक
कृष्ण द्वादशी 16:24, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 04:10, 1 जन॰ तक
अनुराधा 02:03, 2 जन॰ तक
योग
धृति 23:39 तक
शूलअशुभ 20:08, 1 जन॰ तक
करण
बव 08:33 तक
बालव 19:12 तक
कौलव 05:49, 1 जन॰ तक
तैतिल 16:24, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
तुला 22:41 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:06
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
02:58
चंद्रास्त
14:28
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 12:59

अशुभ समय

राहुकाल
08:29 – 09:52
यमगंड
11:14 – 12:37
गुलिक काल
14:00 – 15:23

31 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:06 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:14शुभ
रोग11:14 – 12:37टालें
उद्वेग12:37 – 14:00टालें
चर14:00 – 15:23सामान्य
लाभ15:23 – 16:45शुभ
अमृत16:45 – 18:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:08 – 19:46सामान्य
रोग19:46 – 21:23टालें
काल21:23 – 23:00टालें
लाभ23:00 – 00:37शुभ
उद्वेग00:37 – 02:15टालें
शुभ02:15 – 03:52शुभ
अमृत03:52 – 05:29शुभ
चर05:29 – 07:06सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0608:01दिन
शनि08:0108:56दिन
गुरु08:5609:52दिन
मंगल09:5210:47दिन
सूर्य10:4711:42दिन
शुक्र11:4212:37दिन
बुध12:3713:32दिन
चंद्र13:3214:27दिन
शनि14:2715:23दिन
गुरु15:2316:18दिन
मंगल16:1817:13दिन
सूर्य17:1318:08दिन
शुक्र18:0819:13रात
बुध19:1320:18रात
चंद्र20:1821:23रात
शनि21:2322:28रात
गुरु22:2823:32रात
मंगल23:3200:37रात
सूर्य00:3701:42रात
शुक्र01:4202:47रात
बुध02:4703:52रात
चंद्र03:5204:57रात
शनि04:5706:01रात
गुरु06:0107:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2761° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।