1 जनवरी 2030 को पुणे का पंचांग

मंगलवार, 1 जनवरी 2030, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 1 जनवरी 2030 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (16:24 तक), नक्षत्र अनुराधा (02:03, 2 जन॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:06 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 15:23 से 16:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:06 – 18:09
रात 07:07 तक
तिथि
द्वादशी, 16:24 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
अनुराधा, 02:03 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2030 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 16:24 तक
कृष्ण त्रयोदशी 13:34, 2 जन॰ तक
नक्षत्र
अनुराधा 02:03, 2 जन॰ तक
ज्येष्ठा 23:58, 2 जन॰ तक
योग
शूलअशुभ 20:08 तक
गंडअशुभ 16:36, 2 जन॰ तक
करण
तैतिल 16:24 तक
गर 02:59, 2 जन॰ तक
वणिज 13:34, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:06
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
04:02
चंद्रास्त
15:25
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
15:23 – 16:46
यमगंड
09:52 – 11:15
गुलिक काल
12:38 – 14:00

1 जनवरी 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:06 – 08:29टालें
उद्वेग08:29 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:15सामान्य
लाभ11:15 – 12:38शुभ
अमृत12:38 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:23टालें
शुभ15:23 – 16:46शुभ
रोग16:46 – 18:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:09 – 19:46टालें
लाभ19:46 – 21:23शुभ
उद्वेग21:23 – 23:01टालें
शुभ23:01 – 00:38शुभ
अमृत00:38 – 02:15शुभ
चर02:15 – 03:52सामान्य
रोग03:52 – 05:29टालें
काल05:29 – 07:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0608:02दिन
सूर्य08:0208:57दिन
शुक्र08:5709:52दिन
बुध09:5210:47दिन
चंद्र10:4711:42दिन
शनि11:4212:38दिन
गुरु12:3813:33दिन
मंगल13:3314:28दिन
सूर्य14:2815:23दिन
शुक्र15:2316:18दिन
बुध16:1817:14दिन
चंद्र17:1418:09दिन
शनि18:0919:14रात
गुरु19:1420:19रात
मंगल20:1921:23रात
सूर्य21:2322:28रात
शुक्र22:2823:33रात
बुध23:3300:38रात
चंद्र00:3801:43रात
शनि01:4302:47रात
गुरु02:4703:52रात
मंगल03:5204:57रात
सूर्य04:5706:02रात
शुक्र06:0207:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2761° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।