14 सितंबर 2025 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 14 सितंबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 सितंबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (03:06, 15 सित॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (08:41 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 17:04 से 18:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 18:37
रात 06:17 तक
तिथि
अष्टमी, 03:06 तक
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 सितंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 03:06, 15 सित॰ तक
कृष्ण नवमी 01:31, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:41 तक
मृगशिरा 07:31, 15 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 07:35 तक
सिद्धि 04:55, 15 सित॰ तक
व्यतीपातअशुभ 02:34, 16 सित॰ तक
करण
बालव 16:02 तक
कौलव 03:06, 15 सित॰ तक
तैतिल 14:16, 15 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:03 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
23:36
चंद्रास्त
13:14
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
17:04 – 18:37
यमगंड
12:27 – 13:59
गुलिक काल
15:32 – 17:04

14 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:16 – 07:49टालें
चर07:49 – 09:22सामान्य
लाभ09:22 – 10:54शुभ
अमृत10:54 – 12:27शुभ
काल12:27 – 13:59टालें
शुभ13:59 – 15:32शुभ
रोग15:32 – 17:04टालें
उद्वेग17:04 – 18:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:37 – 20:04शुभ
अमृत20:04 – 21:32शुभ
चर21:32 – 22:59सामान्य
रोग22:59 – 00:27टालें
काल00:27 – 01:54टालें
लाभ01:54 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 04:49टालें
शुभ04:49 – 06:17शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1607:18दिन
शुक्र07:1808:20दिन
बुध08:2009:22दिन
चंद्र09:2210:23दिन
शनि10:2311:25दिन
गुरु11:2512:27दिन
मंगल12:2713:28दिन
सूर्य13:2814:30दिन
शुक्र14:3015:32दिन
बुध15:3216:33दिन
चंद्र16:3317:35दिन
शनि17:3518:37दिन
गुरु18:3719:35रात
मंगल19:3520:33रात
सूर्य20:3321:32रात
शुक्र21:3222:30रात
बुध22:3023:29रात
चंद्र23:2900:27रात
शनि00:2701:25रात
गुरु01:2502:24रात
मंगल02:2403:22रात
सूर्य03:2204:20रात
शुक्र04:2005:19रात
बुध05:1906:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2161° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।