1 जनवरी 2026 को पुष्कर का पंचांग

गुरुवार, 1 जनवरी 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (22:22 तक), नक्षत्र रोहिणी (22:48 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:19 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 13:54 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:19 – 17:50
रात 07:20 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:22 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 22:48 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 22:22 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:53, 2 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 22:48 तक
मृगशिरा 20:04, 2 जन॰ तक
योग
शुभ 17:12 तक
शुक्ल 13:07, 2 जन॰ तक
करण
कौलव 12:06 तक
तैतिल 22:22 तक
गर 08:38, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:19
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
15:31
चंद्रास्त
04:59
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:31 – 06:25
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
13:54 – 15:13
यमगंड
07:19 – 08:38
गुलिक काल
09:57 – 11:16

1 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:19 – 08:38शुभ
रोग08:38 – 09:57टालें
उद्वेग09:57 – 11:16टालें
चर11:16 – 12:35सामान्य
लाभ12:35 – 13:54शुभ
अमृत13:54 – 15:13शुभ
काल15:13 – 16:31टालें
शुभ16:31 – 17:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:50 – 19:31शुभ
चर19:31 – 21:13सामान्य
रोग21:13 – 22:54टालें
काल22:54 – 00:35टालें
लाभ00:35 – 02:16शुभ
उद्वेग02:16 – 03:57टालें
शुभ03:57 – 05:38शुभ
अमृत05:38 – 07:20शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1908:12दिन
मंगल08:1209:05दिन
सूर्य09:0509:57दिन
शुक्र09:5710:50दिन
बुध10:5011:42दिन
चंद्र11:4212:35दिन
शनि12:3513:27दिन
गुरु13:2714:20दिन
मंगल14:2015:13दिन
सूर्य15:1316:05दिन
शुक्र16:0516:58दिन
बुध16:5817:50दिन
चंद्र17:5018:58रात
शनि18:5820:05रात
गुरु20:0521:13रात
मंगल21:1322:20रात
सूर्य22:2023:27रात
शुक्र23:2700:35रात
बुध00:3501:42रात
चंद्र01:4202:50रात
शनि02:5003:57रात
गुरु03:5705:05रात
मंगल05:0506:12रात
सूर्य06:1207:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2203° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।