8 फ़रवरी 2026 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 8 फ़रवरी 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 फ़रवरी 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (05:01, 9 फ़र॰ तक), नक्षत्र स्वाति (05:02, 9 फ़र॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 16:56 से 18:19 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 18:19
रात 07:12 तक
तिथि
सप्तमी, 05:01 तक
अष्टमी
नक्षत्र
स्वाति, 05:02 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 05:01, 9 फ़र॰ तक
कृष्ण अष्टमी 07:27, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 05:02, 9 फ़र॰ तक
विशाखा 07:55, 10 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 00:08, 9 फ़र॰ तक
वृद्धि 00:51, 10 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:55 तक
बव 05:01, 9 फ़र॰ तक
बालव 18:13, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:47
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:29 – 06:21
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
16:56 – 18:19
यमगंड
12:46 – 14:09
गुलिक काल
15:32 – 16:56

8 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:12 – 08:36टालें
चर08:36 – 09:59सामान्य
लाभ09:59 – 11:22शुभ
अमृत11:22 – 12:46शुभ
काल12:46 – 14:09टालें
शुभ14:09 – 15:32शुभ
रोग15:32 – 16:56टालें
उद्वेग16:56 – 18:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:19 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:32शुभ
चर21:32 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:45टालें
काल00:45 – 02:22टालें
लाभ02:22 – 03:58शुभ
उद्वेग03:58 – 05:35टालें
शुभ05:35 – 07:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1208:08दिन
शुक्र08:0809:03दिन
बुध09:0309:59दिन
चंद्र09:5910:54दिन
शनि10:5411:50दिन
गुरु11:5012:46दिन
मंगल12:4613:41दिन
सूर्य13:4114:37दिन
शुक्र14:3715:32दिन
बुध15:3216:28दिन
चंद्र16:2817:23दिन
शनि17:2318:19दिन
गुरु18:1919:23रात
मंगल19:2320:28रात
सूर्य20:2821:32रात
शुक्र21:3222:36रात
बुध22:3623:41रात
चंद्र23:4100:45रात
शनि00:4501:50रात
गुरु01:5002:54रात
मंगल02:5403:58रात
सूर्य03:5805:03रात
शुक्र05:0306:07रात
बुध06:0707:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2217° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।