10 अक्टूबर 2026 को पुष्कर का पंचांग

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (21:20 तक), नक्षत्र हस्त (21:42 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 09:23 से 10:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 18:08
रात 06:28 तक
तिथि
अमावस्या, 21:20 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त, 21:42 तक
चित्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 21:20 तक
शुक्ल प्रतिपदा 21:31, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 21:42 तक
चित्रा 22:32, 11 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 22:02 तक
वैधृतिअशुभ 21:05, 11 अक्टू॰ तक
करण
चतुष्पद 09:24 तक
नाग 21:20 तक
किंस्तुघ्न 09:22, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
05:58
चंद्रास्त
17:46
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:23 – 10:51
यमगंड
13:46 – 15:13
गुलिक काल
06:28 – 07:55

10 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:28 – 07:55टालें
शुभ07:55 – 09:23शुभ
रोग09:23 – 10:51टालें
उद्वेग10:51 – 12:18टालें
चर12:18 – 13:46सामान्य
लाभ13:46 – 15:13शुभ
अमृत15:13 – 16:41शुभ
काल16:41 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:08 – 19:41शुभ
उद्वेग19:41 – 21:13टालें
शुभ21:13 – 22:46शुभ
अमृत22:46 – 00:18शुभ
चर00:18 – 01:51सामान्य
रोग01:51 – 03:23टालें
काल03:23 – 04:56टालें
लाभ04:56 – 06:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2807:26दिन
गुरु07:2608:25दिन
मंगल08:2509:23दिन
सूर्य09:2310:21दिन
शुक्र10:2111:20दिन
बुध11:2012:18दिन
चंद्र12:1813:17दिन
शनि13:1714:15दिन
गुरु14:1515:13दिन
मंगल15:1316:12दिन
सूर्य16:1217:10दिन
शुक्र17:1018:08दिन
बुध18:0819:10रात
चंद्र19:1020:12रात
शनि20:1221:13रात
गुरु21:1322:15रात
मंगल22:1523:17रात
सूर्य23:1700:18रात
शुक्र00:1801:20रात
बुध01:2002:22रात
चंद्र02:2203:23रात
शनि03:2304:25रात
गुरु04:2505:27रात
मंगल05:2706:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2311° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।