29 मार्च 2026 को रांची का पंचांग

रविवार, 29 मार्च 2026, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 29 मार्च 2026 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (07:46 तक), नक्षत्र आश्लेषा (14:38 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 16:30 से 18:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 18:03
रात 05:43 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 14:38 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 मार्च 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 07:46 तक
शुक्ल द्वादशी 07:10, 30 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 14:48, 30 मार्च तक
योग
धृति 18:19 तक
शूलअशुभ 16:51, 30 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:46 तक
बव 19:25 तक
बालव 07:10, 30 मार्च तक
चंद्र राशि
कर्क 14:38 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
14:44
चंद्रास्त
03:17
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
16:30 – 18:03
यमगंड
11:53 – 13:26
गुलिक काल
14:58 – 16:30

29 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:44 – 07:16टालें
चर07:16 – 08:49सामान्य
लाभ08:49 – 10:21शुभ
अमृत10:21 – 11:53शुभ
काल11:53 – 13:26टालें
शुभ13:26 – 14:58शुभ
रोग14:58 – 16:30टालें
उद्वेग16:30 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:03 – 19:30शुभ
अमृत19:30 – 20:58शुभ
चर20:58 – 22:25सामान्य
रोग22:25 – 23:53टालें
काल23:53 – 01:20टालें
लाभ01:20 – 02:48शुभ
उद्वेग02:48 – 04:15टालें
शुभ04:15 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4406:45दिन
शुक्र06:4507:47दिन
बुध07:4708:49दिन
चंद्र08:4909:50दिन
शनि09:5010:52दिन
गुरु10:5211:53दिन
मंगल11:5312:55दिन
सूर्य12:5513:56दिन
शुक्र13:5614:58दिन
बुध14:5816:00दिन
चंद्र16:0017:01दिन
शनि17:0118:03दिन
गुरु18:0319:01रात
मंगल19:0119:59रात
सूर्य19:5920:58रात
शुक्र20:5821:56रात
बुध21:5622:54रात
चंद्र22:5423:53रात
शनि23:5300:51रात
गुरु00:5101:49रात
मंगल01:4902:48रात
सूर्य02:4803:46रात
शुक्र03:4604:44रात
बुध04:4405:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2236° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।