26 मार्च 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

बुधवार, 26 मार्च 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 26 मार्च 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (01:43, 27 मार्च तक), नक्षत्र धनिष्ठा (02:29, 27 मार्च तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:31 पर है। राहुकाल 12:22 से 13:54 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:31
रात 06:12 तक
तिथि
द्वादशी, 01:43 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 02:29 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 मार्च 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 01:43, 27 मार्च तक
कृष्ण त्रयोदशी 23:03, 27 मार्च तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 02:29, 27 मार्च तक
शतभिषा 00:33, 28 मार्च तक
योग
सिद्ध 12:25 तक
साध्य 09:24, 27 मार्च तक
करण
कौलव 14:49 तक
तैतिल 01:43, 27 मार्च तक
गर 12:27, 27 मार्च तक
चंद्र राशि
मकर 15:14 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:31
चंद्रोदय
04:13
चंद्रास्त
15:10
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:47 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 13:54
यमगंड
07:45 – 09:18
गुलिक काल
10:50 – 12:22

26 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:13 – 07:45शुभ
अमृत07:45 – 09:18शुभ
काल09:18 – 10:50टालें
शुभ10:50 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 13:54टालें
उद्वेग13:54 – 15:27टालें
चर15:27 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:31 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:26शुभ
अमृत21:26 – 22:54शुभ
चर22:54 – 00:22सामान्य
रोग00:22 – 01:49टालें
काल01:49 – 03:17टालें
लाभ03:17 – 04:44शुभ
उद्वेग04:44 – 06:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1307:15दिन
चंद्र07:1508:16दिन
शनि08:1609:18दिन
गुरु09:1810:19दिन
मंगल10:1911:21दिन
सूर्य11:2112:22दिन
शुक्र12:2213:24दिन
बुध13:2414:25दिन
चंद्र14:2515:27दिन
शनि15:2716:28दिन
गुरु16:2817:30दिन
मंगल17:3018:31दिन
सूर्य18:3119:30रात
शुक्र19:3020:28रात
बुध20:2821:26रात
चंद्र21:2622:25रात
शनि22:2523:23रात
गुरु23:2300:22रात
मंगल00:2201:20रात
सूर्य01:2002:18रात
शुक्र02:1803:17रात
बुध03:1704:15रात
चंद्र04:1505:13रात
शनि05:1306:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2095° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।