17 अगस्त 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 17 अगस्त 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 17 अगस्त 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (19:24 तक), नक्षत्र रोहिणी (03:17, 18 अग॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 18:56 पर है। राहुकाल 17:17 से 18:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 18:56
रात 05:45 तक
तिथि
नवमी, 19:24 तक
दशमी
नक्षत्र
रोहिणी, 03:17 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अगस्त 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 19:24 तक
कृष्ण दशमी 17:23, 18 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:17, 18 अग॰ तक
मृगशिरा 02:06, 19 अग॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 01:40, 18 अग॰ तक
हर्षण 22:59, 18 अग॰ तक
करण
तैतिल 08:29 तक
गर 19:24 तक
वणिज 06:22, 18 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
18:56
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
14:10
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:17 – 18:56
यमगंड
12:20 – 13:59
गुलिक काल
15:38 – 17:17

17 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:45 – 07:24टालें
चर07:24 – 09:02सामान्य
लाभ09:02 – 10:41शुभ
अमृत10:41 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:59टालें
शुभ13:59 – 15:38शुभ
रोग15:38 – 17:17टालें
उद्वेग17:17 – 18:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:56 – 20:17शुभ
अमृत20:17 – 21:38शुभ
चर21:38 – 22:59सामान्य
रोग22:59 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:42टालें
लाभ01:42 – 03:03शुभ
उद्वेग03:03 – 04:24टालें
शुभ04:24 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4506:51दिन
शुक्र06:5107:57दिन
बुध07:5709:02दिन
चंद्र09:0210:08दिन
शनि10:0811:14दिन
गुरु11:1412:20दिन
मंगल12:2013:26दिन
सूर्य13:2614:32दिन
शुक्र14:3215:38दिन
बुध15:3816:44दिन
चंद्र16:4417:50दिन
शनि17:5018:56दिन
गुरु18:5619:50रात
मंगल19:5020:44रात
सूर्य20:4421:38रात
शुक्र21:3822:32रात
बुध22:3223:26रात
चंद्र23:2600:20रात
शनि00:2001:15रात
गुरु01:1502:09रात
मंगल02:0903:03रात
सूर्य03:0303:57रात
शुक्र03:5704:51रात
बुध04:5105:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2150° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।