16 नवंबर 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 16 नवंबर 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 16 नवंबर 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (04:48, 17 नव॰ तक), नक्षत्र हस्त (02:11, 17 नव॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:20 पर है। राहुकाल 16:00 से 17:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:20
रात 06:43 तक
तिथि
द्वादशी, 04:48 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
हस्त, 02:11 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 04:48, 17 नव॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 07:12, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:11, 17 नव॰ तक
चित्रा 05:01, 18 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 06:46 तक
प्रीति 07:22, 17 नव॰ तक
करण
कौलव 15:40 तक
तैतिल 04:48, 17 नव॰ तक
गर 17:59, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:20
चंद्रोदय
03:04
चंद्रास्त
14:58
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
16:00 – 17:20
यमगंड
12:01 – 13:21
गुलिक काल
14:40 – 16:00

16 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:42 – 08:02टालें
चर08:02 – 09:22सामान्य
लाभ09:22 – 10:41शुभ
अमृत10:41 – 12:01शुभ
काल12:01 – 13:21टालें
शुभ13:21 – 14:40शुभ
रोग14:40 – 16:00टालें
उद्वेग16:00 – 17:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:20 – 19:00शुभ
अमृत19:00 – 20:40शुभ
चर20:40 – 22:21सामान्य
रोग22:21 – 00:01टालें
काल00:01 – 01:42टालें
लाभ01:42 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 05:03टालें
शुभ05:03 – 06:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4207:35दिन
शुक्र07:3508:29दिन
बुध08:2909:22दिन
चंद्र09:2210:15दिन
शनि10:1511:08दिन
गुरु11:0812:01दिन
मंगल12:0112:54दिन
सूर्य12:5413:47दिन
शुक्र13:4714:40दिन
बुध14:4015:33दिन
चंद्र15:3316:26दिन
शनि16:2617:20दिन
गुरु17:2018:27रात
मंगल18:2719:34रात
सूर्य19:3420:40रात
शुक्र20:4021:47रात
बुध21:4722:54रात
चंद्र22:5400:01रात
शनि00:0101:08रात
गुरु01:0802:15रात
मंगल02:1503:22रात
सूर्य03:2204:29रात
शुक्र04:2905:36रात
बुध05:3606:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2185° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।