14 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 14 दिसंबर 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (18:50 तक), नक्षत्र हस्त (08:18 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:04 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 16:01 से 17:18 तक है।

दिन और रात
दिन 07:04 – 17:18
रात 07:05 तक
तिथि
दशमी, 18:50 तक
एकादशी
नक्षत्र
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 18:50 तक
कृष्ण एकादशी 21:20, 15 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 08:18 तक
चित्रा 11:08, 15 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 11:45 तक
शोभन 12:30, 15 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 18:50 तक
बव 08:03, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 21:41 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:04
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
01:53
चंद्रास्त
13:27
दिनमान
10h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
16:01 – 17:18
यमगंड
12:11 – 13:28
गुलिक काल
14:44 – 16:01

14 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:04 – 08:21टालें
चर08:21 – 09:38सामान्य
लाभ09:38 – 10:54शुभ
अमृत10:54 – 12:11शुभ
काल12:11 – 13:28टालें
शुभ13:28 – 14:44शुभ
रोग14:44 – 16:01टालें
उद्वेग16:01 – 17:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:18 – 19:01शुभ
अमृत19:01 – 20:44शुभ
चर20:44 – 22:28सामान्य
रोग22:28 – 00:11टालें
काल00:11 – 01:55टालें
लाभ01:55 – 03:38शुभ
उद्वेग03:38 – 05:21टालें
शुभ05:21 – 07:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0407:55दिन
शुक्र07:5508:46दिन
बुध08:4609:38दिन
चंद्र09:3810:29दिन
शनि10:2911:20दिन
गुरु11:2012:11दिन
मंगल12:1113:02दिन
सूर्य13:0213:53दिन
शुक्र13:5314:44दिन
बुध14:4415:35दिन
चंद्र15:3516:27दिन
शनि16:2717:18दिन
गुरु17:1818:27रात
मंगल18:2719:36रात
सूर्य19:3620:44रात
शुक्र20:4421:53रात
बुध21:5323:02रात
चंद्र23:0200:11रात
शनि00:1101:20रात
गुरु01:2002:29रात
मंगल02:2903:38रात
सूर्य03:3804:47रात
शुक्र04:4705:56रात
बुध05:5607:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2196° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।