18 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (04:59, 19 दिस॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (20:07 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 13:29 से 14:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:19
रात 07:07 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:59 तक
अमावस्या
नक्षत्र
अनुराधा, 20:07 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 04:59, 19 दिस॰ तक
अमावस्या 07:13, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 22:51, 19 दिस॰ तक
योग
धृति 15:05 तक
शूलअशुभ 15:46, 19 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:47 तक
शकुनि 04:59, 19 दिस॰ तक
चतुष्पद 18:08, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
05:37
चंद्रास्त
15:43
दिनमान
10h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
13:29 – 14:46
यमगंड
07:07 – 08:23
गुलिक काल
09:40 – 10:56

18 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:07 – 08:23शुभ
रोग08:23 – 09:40टालें
उद्वेग09:40 – 10:56टालें
चर10:56 – 12:13सामान्य
लाभ12:13 – 13:29शुभ
अमृत13:29 – 14:46शुभ
काल14:46 – 16:03टालें
शुभ16:03 – 17:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:19 – 19:03शुभ
चर19:03 – 20:46सामान्य
रोग20:46 – 22:30टालें
काल22:30 – 00:13टालें
लाभ00:13 – 01:57शुभ
उद्वेग01:57 – 03:40टालें
शुभ03:40 – 05:24शुभ
अमृत05:24 – 07:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0707:58दिन
मंगल07:5808:49दिन
सूर्य08:4909:40दिन
शुक्र09:4010:31दिन
बुध10:3111:22दिन
चंद्र11:2212:13दिन
शनि12:1313:04दिन
गुरु13:0413:55दिन
मंगल13:5514:46दिन
सूर्य14:4615:37दिन
शुक्र15:3716:28दिन
बुध16:2817:19दिन
चंद्र17:1918:28रात
शनि18:2819:37रात
गुरु19:3720:46रात
मंगल20:4621:55रात
सूर्य21:5523:04रात
शुक्र23:0400:13रात
बुध00:1301:22रात
चंद्र01:2202:31रात
शनि02:3103:40रात
गुरु03:4004:49रात
मंगल04:4905:58रात
सूर्य05:5807:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2197° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।