12 जनवरी 2026 को ऋषिकेश का पंचांग

सोमवार, 12 जनवरी 2026, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 जनवरी 2026 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (12:43 तक), नक्षत्र स्वाति (21:05 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 08:31 से 09:49 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:36
रात 07:13 तक
तिथि
नवमी, 12:43 तक
दशमी
नक्षत्र
स्वाति, 21:05 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जनवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 12:43 तक
कृष्ण दशमी 15:18, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 21:05 तक
विशाखा 00:06, 14 जन॰ तक
योग
धृति 18:12 तक
शूलअशुभ 19:04, 13 जन॰ तक
करण
गर 12:43 तक
वणिज 02:00, 13 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:18, 13 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
01:36
चंद्रास्त
12:27
दिनमान
10h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
08:31 – 09:49
यमगंड
11:07 – 12:25
गुलिक काल
13:42 – 15:00

12 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:13 – 08:31शुभ
काल08:31 – 09:49टालें
शुभ09:49 – 11:07शुभ
रोग11:07 – 12:25टालें
उद्वेग12:25 – 13:42टालें
चर13:42 – 15:00सामान्य
लाभ15:00 – 16:18शुभ
अमृत16:18 – 17:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:36 – 19:18सामान्य
रोग19:18 – 21:00टालें
काल21:00 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:25शुभ
उद्वेग00:25 – 02:07टालें
शुभ02:07 – 03:49शुभ
अमृत03:49 – 05:31शुभ
चर05:31 – 07:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1308:05दिन
शनि08:0508:57दिन
गुरु08:5709:49दिन
मंगल09:4910:41दिन
सूर्य10:4111:33दिन
शुक्र11:3312:25दिन
बुध12:2513:16दिन
चंद्र13:1614:08दिन
शनि14:0815:00दिन
गुरु15:0015:52दिन
मंगल15:5216:44दिन
सूर्य16:4417:36दिन
शुक्र17:3618:44रात
बुध18:4419:52रात
चंद्र19:5221:00रात
शनि21:0022:08रात
गुरु22:0823:16रात
मंगल23:1600:25रात
सूर्य00:2501:33रात
शुक्र01:3302:41रात
बुध02:4103:49रात
चंद्र03:4904:57रात
शनि04:5706:05रात
गुरु06:0507:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2207° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।