1 फ़रवरी 2026 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 1 फ़रवरी 2026, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 फ़रवरी 2026 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (03:39, 2 फ़र॰ तक), नक्षत्र पुष्य (23:58 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 16:32 से 17:53 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:53
रात 07:06 तक
तिथि
पूर्णिमा, 03:39 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पुष्य, 23:58 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 03:39, 2 फ़र॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 01:52, 3 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 23:58 तक
आश्लेषा 22:47, 2 फ़र॰ तक
योग
प्रीति 10:18 तक
आयुष्मान 07:20, 2 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:43 तक
बव 03:39, 2 फ़र॰ तक
बालव 14:42, 2 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
17:19
चंद्रास्त
06:42
दिनमान
10h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
16:32 – 17:53
यमगंड
12:30 – 13:51
गुलिक काल
15:12 – 16:32

1 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:07 – 08:28टालें
चर08:28 – 09:48सामान्य
लाभ09:48 – 11:09शुभ
अमृत11:09 – 12:30शुभ
काल12:30 – 13:51टालें
शुभ13:51 – 15:12शुभ
रोग15:12 – 16:32टालें
उद्वेग16:32 – 17:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:53 – 19:32शुभ
अमृत19:32 – 21:11शुभ
चर21:11 – 22:51सामान्य
रोग22:51 – 00:30टालें
काल00:30 – 02:09टालें
लाभ02:09 – 03:48शुभ
उद्वेग03:48 – 05:27टालें
शुभ05:27 – 07:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0708:01दिन
शुक्र08:0108:55दिन
बुध08:5509:48दिन
चंद्र09:4810:42दिन
शनि10:4211:36दिन
गुरु11:3612:30दिन
मंगल12:3013:24दिन
सूर्य13:2414:18दिन
शुक्र14:1815:12दिन
बुध15:1216:05दिन
चंद्र16:0516:59दिन
शनि16:5917:53दिन
गुरु17:5318:59रात
मंगल18:5920:05रात
सूर्य20:0521:11रात
शुक्र21:1122:18रात
बुध22:1823:24रात
चंद्र23:2400:30रात
शनि00:3001:36रात
गुरु01:3602:42रात
मंगल02:4203:48रात
सूर्य03:4804:54रात
शुक्र04:5406:00रात
बुध06:0007:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2215° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।