24 फ़रवरी 2027 को ऋषिकेश का पंचांग

बुधवार, 24 फ़रवरी 2027, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 24 फ़रवरी 2027 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (20:40 तक), नक्षत्र हस्त (09:39 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 12:30 से 13:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 18:11
रात 06:47 तक
तिथि
चतुर्थी, 20:40 तक
पंचमी
नक्षत्र
हस्त, 09:39 तक
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 20:40 तक
कृष्ण पंचमी 20:17, 25 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:39 तक
चित्रा 09:33, 25 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 00:27, 25 फ़र॰ तक
वृद्धि 23:04, 25 फ़र॰ तक
करण
बव 09:09 तक
बालव 20:40 तक
कौलव 08:23, 25 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 21:30 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
21:56
चंद्रास्त
08:31
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 13:55
यमगंड
08:14 – 09:39
गुलिक काल
11:04 – 12:30

24 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:48 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:39शुभ
काल09:39 – 11:04टालें
शुभ11:04 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 13:55टालें
उद्वेग13:55 – 15:21टालें
चर15:21 – 16:46सामान्य
लाभ16:46 – 18:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:11 – 19:46टालें
शुभ19:46 – 21:20शुभ
अमृत21:20 – 22:55शुभ
चर22:55 – 00:29सामान्य
रोग00:29 – 02:04टालें
काल02:04 – 03:38टालें
लाभ03:38 – 05:13शुभ
उद्वेग05:13 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4807:45दिन
चंद्र07:4508:42दिन
शनि08:4209:39दिन
गुरु09:3910:36दिन
मंगल10:3611:33दिन
सूर्य11:3312:30दिन
शुक्र12:3013:27दिन
बुध13:2714:24दिन
चंद्र14:2415:21दिन
शनि15:2116:17दिन
गुरु16:1717:14दिन
मंगल17:1418:11दिन
सूर्य18:1119:14रात
शुक्र19:1420:17रात
बुध20:1721:20रात
चंद्र21:2022:23रात
शनि22:2323:26रात
गुरु23:2600:29रात
मंगल00:2901:32रात
सूर्य01:3202:35रात
शुक्र02:3503:38रात
बुध03:3804:41रात
चंद्र04:4105:44रात
शनि05:4406:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2363° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।