20 नवंबर 2027 को ऋषिकेश का पंचांग

शनिवार, 20 नवंबर 2027, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 नवंबर 2027 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (19:17 तक), नक्षत्र आश्लेषा (23:07 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 09:23 से 10:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:18
रात 06:46 तक
तिथि
सप्तमी, 19:17 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 23:07 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:17 तक
कृष्ण अष्टमी 17:20, 21 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:52, 21 नव॰ तक
योग
ब्रह्म 22:12 तक
इंद्र 19:25, 21 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:18 तक
बव 19:17 तक
बालव 06:18, 21 नव॰ तक
कौलव 17:20, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 23:07 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
23:36
चंद्रास्त
12:13
दिनमान
10h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
09:23 – 10:43
यमगंड
13:21 – 14:40
गुलिक काल
06:45 – 08:04

20 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:45 – 08:04टालें
शुभ08:04 – 09:23शुभ
रोग09:23 – 10:43टालें
उद्वेग10:43 – 12:02टालें
चर12:02 – 13:21सामान्य
लाभ13:21 – 14:40शुभ
अमृत14:40 – 15:59शुभ
काल15:59 – 17:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:18 – 18:59शुभ
उद्वेग18:59 – 20:40टालें
शुभ20:40 – 22:21शुभ
अमृत22:21 – 00:02शुभ
चर00:02 – 01:43सामान्य
रोग01:43 – 03:24टालें
काल03:24 – 05:05टालें
लाभ05:05 – 06:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4507:38दिन
गुरु07:3808:31दिन
मंगल08:3109:23दिन
सूर्य09:2310:16दिन
शुक्र10:1611:09दिन
बुध11:0912:02दिन
चंद्र12:0212:54दिन
शनि12:5413:47दिन
गुरु13:4714:40दिन
मंगल14:4015:33दिन
सूर्य15:3316:25दिन
शुक्र16:2517:18दिन
बुध17:1818:25रात
चंद्र18:2519:33रात
शनि19:3320:40रात
गुरु20:4021:47रात
मंगल21:4722:55रात
सूर्य22:5500:02रात
शुक्र00:0201:09रात
बुध01:0902:17रात
चंद्र02:1703:24रात
शनि03:2404:31रात
गुरु04:3105:39रात
मंगल05:3906:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2466° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।