10 नवंबर 2028 को ऋषिकेश का पंचांग

शुक्रवार, 10 नवंबर 2028, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 नवंबर 2028 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (14:03 तक), नक्षत्र आश्लेषा (13:42 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 10:39 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:23
रात 06:38 तक
तिथि
अष्टमी, 14:03 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 13:42 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 14:03 तक
कृष्ण नवमी 11:59, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:20, 11 नव॰ तक
योग
शुक्ल 06:58 तक
ब्रह्म 04:13, 11 नव॰ तक
इंद्र 01:08, 12 नव॰ तक
करण
कौलव 14:03 तक
तैतिल 01:05, 11 नव॰ तक
गर 11:59, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 13:42 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:01
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:39 – 12:00
यमगंड
14:41 – 16:02
गुलिक काल
07:58 – 09:19

10 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:38 – 07:58सामान्य
लाभ07:58 – 09:19शुभ
अमृत09:19 – 10:39शुभ
काल10:39 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:21शुभ
रोग13:21 – 14:41टालें
उद्वेग14:41 – 16:02टालें
चर16:02 – 17:23सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:23 – 19:02टालें
काल19:02 – 20:42टालें
लाभ20:42 – 22:21शुभ
उद्वेग22:21 – 00:01टालें
शुभ00:01 – 01:40शुभ
अमृत01:40 – 03:19शुभ
चर03:19 – 04:59सामान्य
रोग04:59 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3807:31दिन
बुध07:3108:25दिन
चंद्र08:2509:19दिन
शनि09:1910:13दिन
गुरु10:1311:06दिन
मंगल11:0612:00दिन
सूर्य12:0012:54दिन
शुक्र12:5413:48दिन
बुध13:4814:41दिन
चंद्र14:4115:35दिन
शनि15:3516:29दिन
गुरु16:2917:23दिन
मंगल17:2318:29रात
सूर्य18:2919:35रात
शुक्र19:3520:42रात
बुध20:4221:48रात
चंद्र21:4822:54रात
शनि22:5400:01रात
गुरु00:0101:07रात
मंगल01:0702:13रात
सूर्य02:1303:19रात
शुक्र03:1904:26रात
बुध04:2605:32रात
चंद्र05:3206:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2602° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।