13 नवंबर 2028 को ऋषिकेश का पंचांग

सोमवार, 13 नवंबर 2028, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 13 नवंबर 2028 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (06:42 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (08:28 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 08:00 से 09:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 17:21
रात 06:41 तक
तिथि
द्वादशी, 03:41 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
हस्त, 06:10 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 नवंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 06:42 तक
कृष्ण द्वादशी 03:41, 14 नव॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 00:35, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:10, 14 नव॰ तक
चित्रा 03:49, 15 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 18:08 तक
प्रीति 14:25, 14 नव॰ तक
करण
बालव 06:42 तक
कौलव 17:13 तक
तैतिल 03:41, 14 नव॰ तक
गर 14:08, 14 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
02:54
चंद्रास्त
14:47
दिनमान
10h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:00 – 09:20
यमगंड
10:40 – 12:00
गुलिक काल
13:21 – 14:41

13 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:40 – 08:00शुभ
काल08:00 – 09:20टालें
शुभ09:20 – 10:40शुभ
रोग10:40 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:21टालें
चर13:21 – 14:41सामान्य
लाभ14:41 – 16:01शुभ
अमृत16:01 – 17:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:21 – 19:01सामान्य
रोग19:01 – 20:41टालें
काल20:41 – 22:21टालें
लाभ22:21 – 00:01शुभ
उद्वेग00:01 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:21शुभ
अमृत03:21 – 05:01शुभ
चर05:01 – 06:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4007:33दिन
शनि07:3308:27दिन
गुरु08:2709:20दिन
मंगल09:2010:14दिन
सूर्य10:1411:07दिन
शुक्र11:0712:00दिन
बुध12:0012:54दिन
चंद्र12:5413:47दिन
शनि13:4714:41दिन
गुरु14:4115:34दिन
मंगल15:3416:28दिन
सूर्य16:2817:21दिन
शुक्र17:2118:28रात
बुध18:2819:34रात
चंद्र19:3420:41रात
शनि20:4121:48रात
गुरु21:4822:54रात
मंगल22:5400:01रात
सूर्य00:0101:08रात
शुक्र01:0802:14रात
बुध02:1403:21रात
चंद्र03:2104:28रात
शनि04:2805:34रात
गुरु05:3406:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2603° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।