13 फ़रवरी 2029 को ऋषिकेश का पंचांग

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2029, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2029 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:01 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (03:40, 14 फ़र॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:58 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 15:17 से 16:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:58 – 18:03
रात 06:57 तक
तिथि
अमावस्या, 16:01 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
धनिष्ठा, 03:40 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 16:01 तक
शुक्ल प्रतिपदा 17:49, 14 फ़र॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 03:40, 14 फ़र॰ तक
शतभिषा 06:05, 15 फ़र॰ तक
योग
वरीयान 13:21 तक
परिघअशुभ 13:34, 14 फ़र॰ तक
करण
नाग 16:01 तक
किंस्तुघ्न 04:52, 14 फ़र॰ तक
बव 17:49, 14 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मकर 14:34 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:58
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
06:38
चंद्रास्त
18:07
दिनमान
11h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:15 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
15:17 – 16:40
यमगंड
09:44 – 11:08
गुलिक काल
12:31 – 13:54

13 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:58 – 08:21टालें
उद्वेग08:21 – 09:44टालें
चर09:44 – 11:08सामान्य
लाभ11:08 – 12:31शुभ
अमृत12:31 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:17टालें
शुभ15:17 – 16:40शुभ
रोग16:40 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:03 – 19:40टालें
लाभ19:40 – 21:17शुभ
उद्वेग21:17 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:30शुभ
अमृत00:30 – 02:07शुभ
चर02:07 – 03:44सामान्य
रोग03:44 – 05:20टालें
काल05:20 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5807:53दिन
सूर्य07:5308:49दिन
शुक्र08:4909:44दिन
बुध09:4410:40दिन
चंद्र10:4011:35दिन
शनि11:3512:31दिन
गुरु12:3113:26दिन
मंगल13:2614:22दिन
सूर्य14:2215:17दिन
शुक्र15:1716:12दिन
बुध16:1217:08दिन
चंद्र17:0818:03दिन
शनि18:0319:08रात
गुरु19:0820:12रात
मंगल20:1221:17रात
सूर्य21:1722:21रात
शुक्र22:2123:26रात
बुध23:2600:30रात
चंद्र00:3001:35रात
शनि01:3502:39रात
गुरु02:3903:44रात
मंगल03:4404:48रात
सूर्य04:4805:53रात
शुक्र05:5306:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2638° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।