31 दिसंबर 2024 को रियाद का पंचांग

मंगलवार, 31 दिसंबर 2024, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

मंगलवार, 31 दिसंबर 2024 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (00:52, 1 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (21:33 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 14:35 से 15:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:15
रात 06:37 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:52 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 21:33 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2024 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 00:52, 1 जन॰ तक
शुक्ल द्वितीया 23:54, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 21:16, 1 जन॰ तक
योग
ध्रुव 16:29 तक
व्याघातअशुभ 14:36, 1 जन॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 13:12 तक
बव 00:52, 1 जन॰ तक
बालव 12:26, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 03:31, 1 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
07:07
चंद्रास्त
17:40
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
14:35 – 15:55
यमगंड
09:16 – 10:36
गुलिक काल
11:56 – 13:16

31 दिसंबर 2024 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:37 – 07:57टालें
उद्वेग07:57 – 09:16टालें
चर09:16 – 10:36सामान्य
लाभ10:36 – 11:56शुभ
अमृत11:56 – 13:16शुभ
काल13:16 – 14:35टालें
शुभ14:35 – 15:55शुभ
रोग15:55 – 17:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:15 – 18:55टालें
लाभ18:55 – 20:35शुभ
उद्वेग20:35 – 22:16टालें
शुभ22:16 – 23:56शुभ
अमृत23:56 – 01:36शुभ
चर01:36 – 03:16सामान्य
रोग03:16 – 04:57टालें
काल04:57 – 06:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3707:30दिन
सूर्य07:3008:23दिन
शुक्र08:2309:16दिन
बुध09:1610:09दिन
चंद्र10:0911:03दिन
शनि11:0311:56दिन
गुरु11:5612:49दिन
मंगल12:4913:42दिन
सूर्य13:4214:35दिन
शुक्र14:3515:28दिन
बुध15:2816:22दिन
चंद्र16:2217:15दिन
शनि17:1518:22रात
गुरु18:2219:29रात
मंगल19:2920:35रात
सूर्य20:3521:42रात
शुक्र21:4222:49रात
बुध22:4923:56रात
चंद्र23:5601:03रात
शनि01:0302:10रात
गुरु02:1003:16रात
मंगल03:1604:23रात
सूर्य04:2305:30रात
शुक्र05:3006:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2063° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।