11 जनवरी 2025 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 11 जनवरी 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 11 जनवरी 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (04:04, 12 जन॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (09:59 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 09:20 से 10:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:23
रात 06:39 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:04 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 09:59 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 04:04, 12 जन॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:33, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:59 तक
मृगशिरा 08:54, 12 जन॰ तक
योग
शुक्ल 09:18 तक
ब्रह्म 06:39, 12 जन॰ तक
इंद्र 04:14, 13 जन॰ तक
करण
कौलव 16:56 तक
तैतिल 04:04, 12 जन॰ तक
गर 15:16, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 21:25 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
14:48
चंद्रास्त
04:12
दिनमान
10h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
09:20 – 10:40
यमगंड
13:21 – 14:42
गुलिक काल
06:39 – 07:59

11 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:39 – 07:59टालें
शुभ07:59 – 09:20शुभ
रोग09:20 – 10:40टालें
उद्वेग10:40 – 12:01टालें
चर12:01 – 13:21सामान्य
लाभ13:21 – 14:42शुभ
अमृत14:42 – 16:02शुभ
काल16:02 – 17:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:23 – 19:02शुभ
उद्वेग19:02 – 20:42टालें
शुभ20:42 – 22:21शुभ
अमृत22:21 – 00:01शुभ
चर00:01 – 01:40सामान्य
रोग01:40 – 03:20टालें
काल03:20 – 04:59टालें
लाभ04:59 – 06:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3907:32दिन
गुरु07:3208:26दिन
मंगल08:2609:20दिन
सूर्य09:2010:13दिन
शुक्र10:1311:07दिन
बुध11:0712:01दिन
चंद्र12:0112:54दिन
शनि12:5413:48दिन
गुरु13:4814:42दिन
मंगल14:4215:35दिन
सूर्य15:3516:29दिन
शुक्र16:2917:23दिन
बुध17:2318:29रात
चंद्र18:2919:35रात
शनि19:3520:42रात
गुरु20:4221:48रात
मंगल21:4822:54रात
सूर्य22:5400:01रात
शुक्र00:0101:07रात
बुध01:0702:13रात
चंद्र02:1303:20रात
शनि03:2004:26रात
गुरु04:2605:32रात
मंगल05:3206:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2067° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।