14 जनवरी 2026 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 14 जनवरी 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 14 जनवरी 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (15:23 तक), नक्षत्र अनुराधा (00:33, 15 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 12:02 से 13:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:25
रात 06:39 तक
तिथि
एकादशी, 15:23 तक
द्वादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 00:33 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जनवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 15:23 तक
कृष्ण द्वादशी 17:47, 15 जन॰ तक
नक्षत्र
अनुराधा 00:33, 15 जन॰ तक
ज्येष्ठा 03:17, 16 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 17:25 तक
वृद्धि 18:08, 15 जन॰ तक
करण
बालव 15:23 तक
कौलव 04:37, 15 जन॰ तक
तैतिल 17:47, 15 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
02:56
चंद्रास्त
13:34
दिनमान
10h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:23 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:02 – 13:22
यमगंड
08:00 – 09:20
गुलिक काल
10:41 – 12:02

14 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:39 – 08:00शुभ
अमृत08:00 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:02शुभ
रोग12:02 – 13:22टालें
उद्वेग13:22 – 14:43टालें
चर14:43 – 16:04सामान्य
लाभ16:04 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 19:04टालें
शुभ19:04 – 20:43शुभ
अमृत20:43 – 22:22शुभ
चर22:22 – 00:02सामान्य
रोग00:02 – 01:41टालें
काल01:41 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 05:00शुभ
उद्वेग05:00 – 06:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3907:33दिन
चंद्र07:3308:26दिन
शनि08:2609:20दिन
गुरु09:2010:14दिन
मंगल10:1411:08दिन
सूर्य11:0812:02दिन
शुक्र12:0212:55दिन
बुध12:5513:49दिन
चंद्र13:4914:43दिन
शनि14:4315:37दिन
गुरु15:3716:31दिन
मंगल16:3117:25दिन
सूर्य17:2518:31रात
शुक्र18:3119:37रात
बुध19:3720:43रात
चंद्र20:4321:49रात
शनि21:4922:55रात
गुरु22:5500:02रात
मंगल00:0201:08रात
सूर्य01:0802:14रात
शुक्र02:1403:20रात
बुध03:2004:26रात
चंद्र04:2605:33रात
शनि05:3306:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2208° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।