21 जनवरी 2026 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 21 जनवरी 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 21 जनवरी 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (00:17, 22 जन॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (11:28 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:30 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:30
रात 06:38 तक
तिथि
तृतीया, 00:17 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 11:28 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 00:17, 22 जन॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 23:58, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 11:57, 22 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 16:28 तक
वरीयान 15:07, 22 जन॰ तक
करण
तैतिल 12:18 तक
गर 00:17, 22 जन॰ तक
वणिज 12:11, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:30
चंद्रोदय
08:21
चंद्रास्त
19:59
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:25
यमगंड
08:00 – 09:21
गुलिक काल
10:43 – 12:04

21 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:38 – 08:00शुभ
अमृत08:00 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:43टालें
शुभ10:43 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:25टालें
उद्वेग13:25 – 14:47टालें
चर14:47 – 16:08सामान्य
लाभ16:08 – 17:30शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:30 – 19:08टालें
शुभ19:08 – 20:47शुभ
अमृत20:47 – 22:25शुभ
चर22:25 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:42टालें
काल01:42 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:59शुभ
उद्वेग04:59 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3807:32दिन
चंद्र07:3208:27दिन
शनि08:2709:21दिन
गुरु09:2110:15दिन
मंगल10:1511:10दिन
सूर्य11:1012:04दिन
शुक्र12:0412:58दिन
बुध12:5813:53दिन
चंद्र13:5314:47दिन
शनि14:4715:41दिन
गुरु15:4116:35दिन
मंगल16:3517:30दिन
सूर्य17:3018:35रात
शुक्र18:3519:41रात
बुध19:4120:47रात
चंद्र20:4721:53रात
शनि21:5322:58रात
गुरु22:5800:04रात
मंगल00:0401:10रात
सूर्य01:1002:15रात
शुक्र02:1503:21रात
बुध03:2104:27रात
चंद्र04:2705:32रात
शनि05:3206:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2210° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।