19 मार्च 2026 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 19 मार्च 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 19 मार्च 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (02:22, 20 मार्च तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (01:35, 20 मार्च तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 13:31 से 15:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:03
रात 05:57 तक
तिथि
प्रतिपदा, 02:22 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 01:35 तक
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 मार्च 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 02:22, 20 मार्च तक
शुक्ल द्वितीया 00:01, 21 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 01:35, 20 मार्च तक
रेवती 23:57, 20 मार्च तक
योग
शुक्ल 22:47 तक
ब्रह्म 19:45, 20 मार्च तक
करण
किंस्तुघ्न 15:26 तक
बव 02:22, 20 मार्च तक
बालव 13:14, 20 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
05:59
चंद्रास्त
18:33
दिनमान
12h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
13:31 – 15:02
यमगंड
05:58 – 07:29
गुलिक काल
08:59 – 10:30

19 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:58 – 07:29शुभ
रोग07:29 – 08:59टालें
उद्वेग08:59 – 10:30टालें
चर10:30 – 12:01सामान्य
लाभ12:01 – 13:31शुभ
अमृत13:31 – 15:02शुभ
काल15:02 – 16:33टालें
शुभ16:33 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:03 – 19:32शुभ
चर19:32 – 21:02सामान्य
रोग21:02 – 22:31टालें
काल22:31 – 00:00टालें
लाभ00:00 – 01:29शुभ
उद्वेग01:29 – 02:58टालें
शुभ02:58 – 04:28शुभ
अमृत04:28 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5806:58दिन
मंगल06:5807:59दिन
सूर्य07:5908:59दिन
शुक्र08:5910:00दिन
बुध10:0011:00दिन
चंद्र11:0012:01दिन
शनि12:0113:01दिन
गुरु13:0114:01दिन
मंगल14:0115:02दिन
सूर्य15:0216:02दिन
शुक्र16:0217:03दिन
बुध17:0318:03दिन
चंद्र18:0319:03रात
शनि19:0320:02रात
गुरु20:0221:02रात
मंगल21:0222:01रात
सूर्य22:0123:01रात
शुक्र23:0100:00रात
बुध00:0001:00रात
चंद्र01:0001:59रात
शनि01:5902:58रात
गुरु02:5803:58रात
मंगल03:5804:57रात
सूर्य04:5705:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2232° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।