20 मार्च 2026 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 20 मार्च 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (00:01, 21 मार्च तक), नक्षत्र रेवती (23:57 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 10:29 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:04
रात 05:56 तक
तिथि
द्वितीया, 00:01 तक
तृतीया
नक्षत्र
रेवती, 23:57 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मार्च 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 00:01, 21 मार्च तक
शुक्ल तृतीया 21:26, 21 मार्च तक
नक्षत्र
रेवती 23:57 तक
अश्विनी 22:07, 21 मार्च तक
योग
ब्रह्म 19:45 तक
इंद्र 16:31, 21 मार्च तक
करण
बालव 13:14 तक
कौलव 00:01, 21 मार्च तक
तैतिल 10:45, 21 मार्च तक
चंद्र राशि
मीन 23:57 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
06:34
चंद्रास्त
19:35
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
10:29 – 12:00
यमगंड
15:02 – 16:33
गुलिक काल
07:28 – 08:59

20 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:57 – 07:28सामान्य
लाभ07:28 – 08:59शुभ
अमृत08:59 – 10:29शुभ
काल10:29 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:31शुभ
रोग13:31 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:33टालें
चर16:33 – 18:04सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:04 – 19:33टालें
काल19:33 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:31शुभ
उद्वेग22:31 – 00:00टालें
शुभ00:00 – 01:29शुभ
अमृत01:29 – 02:58शुभ
चर02:58 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 05:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5706:57दिन
बुध06:5707:58दिन
चंद्र07:5808:59दिन
शनि08:5909:59दिन
गुरु09:5911:00दिन
मंगल11:0012:00दिन
सूर्य12:0013:01दिन
शुक्र13:0114:01दिन
बुध14:0115:02दिन
चंद्र15:0216:03दिन
शनि16:0317:03दिन
गुरु17:0318:04दिन
मंगल18:0419:03रात
सूर्य19:0320:02रात
शुक्र20:0221:02रात
बुध21:0222:01रात
चंद्र22:0123:00रात
शनि23:0000:00रात
गुरु00:0000:59रात
मंगल00:5901:58रात
सूर्य01:5802:58रात
शुक्र02:5803:57रात
बुध03:5704:56रात
चंद्र04:5605:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2233° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।