24 मार्च 2026 को रियाद का पंचांग

मंगलवार, 24 मार्च 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

मंगलवार, 24 मार्च 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (13:38 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:35 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 15:02 से 16:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:05
रात 05:52 तक
तिथि
षष्ठी, 13:38 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रोहिणी, 16:35 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 13:38 तक
शुक्ल सप्तमी 11:20, 25 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:35 तक
मृगशिरा 15:03, 25 मार्च तक
योग
प्रीति 06:37 तक
आयुष्मान 03:32, 25 मार्च तक
सौभाग्य 00:39, 26 मार्च तक
करण
तैतिल 13:38 तक
गर 00:27, 25 मार्च तक
वणिज 11:20, 25 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 03:47, 25 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
09:36
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
15:02 – 16:34
यमगंड
08:56 – 10:28
गुलिक काल
11:59 – 13:31

24 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:53 – 07:24टालें
उद्वेग07:24 – 08:56टालें
चर08:56 – 10:28सामान्य
लाभ10:28 – 11:59शुभ
अमृत11:59 – 13:31शुभ
काल13:31 – 15:02टालें
शुभ15:02 – 16:34शुभ
रोग16:34 – 18:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:05 – 19:34टालें
लाभ19:34 – 21:02शुभ
उद्वेग21:02 – 22:30टालें
शुभ22:30 – 23:59शुभ
अमृत23:59 – 01:27शुभ
चर01:27 – 02:55सामान्य
रोग02:55 – 04:23टालें
काल04:23 – 05:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5306:54दिन
सूर्य06:5407:55दिन
शुक्र07:5508:56दिन
बुध08:5609:57दिन
चंद्र09:5710:58दिन
शनि10:5811:59दिन
गुरु11:5913:00दिन
मंगल13:0014:01दिन
सूर्य14:0115:02दिन
शुक्र15:0216:03दिन
बुध16:0317:04दिन
चंद्र17:0418:05दिन
शनि18:0519:04रात
गुरु19:0420:03रात
मंगल20:0321:02रात
सूर्य21:0222:01रात
शुक्र22:0123:00रात
बुध23:0023:59रात
चंद्र23:5900:57रात
शनि00:5701:56रात
गुरु01:5602:55रात
मंगल02:5503:54रात
सूर्य03:5404:53रात
शुक्र04:5305:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2234° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।