9 सितंबर 2026 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 9 सितंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (10:01 तक), नक्षत्र आश्लेषा (12:44 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 11:50 से 13:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:03
रात 05:37 तक
तिथि
त्रयोदशी, 10:01 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 12:44 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 सितंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 10:01 तक
कृष्ण चतुर्दशी 08:03, 10 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 11:34, 10 सित॰ तक
योग
शिव 19:22 तक
सिद्ध 16:47, 10 सित॰ तक
करण
वणिज 10:01 तक
विष्टि (भद्रा) 21:00 तक
शकुनि 08:03, 10 सित॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 12:44 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
03:37
चंद्रास्त
16:58
दिनमान
12h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:15 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:50 – 13:23
यमगंड
07:10 – 08:43
गुलिक काल
10:16 – 11:50

9 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:37 – 07:10शुभ
अमृत07:10 – 08:43शुभ
काल08:43 – 10:16टालें
शुभ10:16 – 11:50शुभ
रोग11:50 – 13:23टालें
उद्वेग13:23 – 14:56टालें
चर14:56 – 16:30सामान्य
लाभ16:30 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:03 – 19:30टालें
शुभ19:30 – 20:57शुभ
अमृत20:57 – 22:23शुभ
चर22:23 – 23:50सामान्य
रोग23:50 – 01:17टालें
काल01:17 – 02:43टालें
लाभ02:43 – 04:10शुभ
उद्वेग04:10 – 05:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3706:39दिन
चंद्र06:3907:41दिन
शनि07:4108:43दिन
गुरु08:4309:45दिन
मंगल09:4510:48दिन
सूर्य10:4811:50दिन
शुक्र11:5012:52दिन
बुध12:5213:54दिन
चंद्र13:5414:56दिन
शनि14:5615:59दिन
गुरु15:5917:01दिन
मंगल17:0118:03दिन
सूर्य18:0319:01रात
शुक्र19:0119:59रात
बुध19:5920:57रात
चंद्र20:5721:54रात
शनि21:5422:52रात
गुरु22:5223:50रात
मंगल23:5000:48रात
सूर्य00:4801:46रात
शुक्र01:4602:43रात
बुध02:4303:41रात
चंद्र03:4104:39रात
शनि04:3905:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
14 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2299° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।