13 सितंबर 2026 को रियाद का पंचांग

रविवार, 13 सितंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 13 सितंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (04:37, 14 सित॰ तक), नक्षत्र हस्त (10:37 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 16:26 से 17:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 17:59
रात 05:38 तक
तिथि
तृतीया, 04:37 तक
नक्षत्र
हस्त, 10:37 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 सितंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 04:37, 14 सित॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 05:14, 15 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 10:37 तक
चित्रा 11:25, 14 सित॰ तक
योग
शुक्ल 11:13 तक
ब्रह्म 10:16, 14 सित॰ तक
करण
तैतिल 16:33 तक
गर 04:37, 14 सित॰ तक
वणिज 16:51, 14 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 22:56 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
07:35
चंद्रास्त
19:14
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
16:26 – 17:59
यमगंड
11:48 – 13:21
गुलिक काल
14:54 – 16:26

13 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:38 – 07:11टालें
चर07:11 – 08:43सामान्य
लाभ08:43 – 10:16शुभ
अमृत10:16 – 11:48शुभ
काल11:48 – 13:21टालें
शुभ13:21 – 14:54शुभ
रोग14:54 – 16:26टालें
उद्वेग16:26 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:59 – 19:26शुभ
अमृत19:26 – 20:54शुभ
चर20:54 – 22:21सामान्य
रोग22:21 – 23:49टालें
काल23:49 – 01:16टालें
लाभ01:16 – 02:43शुभ
उद्वेग02:43 – 04:11टालें
शुभ04:11 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3806:40दिन
शुक्र06:4007:41दिन
बुध07:4108:43दिन
चंद्र08:4309:45दिन
शनि09:4510:47दिन
गुरु10:4711:48दिन
मंगल11:4812:50दिन
सूर्य12:5013:52दिन
शुक्र13:5214:54दिन
बुध14:5415:55दिन
चंद्र15:5516:57दिन
शनि16:5717:59दिन
गुरु17:5918:57रात
मंगल18:5719:55रात
सूर्य19:5520:54रात
शुक्र20:5421:52रात
बुध21:5222:50रात
चंद्र22:5023:49रात
शनि23:4900:47रात
गुरु00:4701:45रात
मंगल01:4502:43रात
सूर्य02:4303:42रात
शुक्र03:4204:40रात
बुध04:4005:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2300° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।