25 नवंबर 2026 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 25 नवंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 25 नवंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (14:20 तक), नक्षत्र रोहिणी (18:06 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 17:03 पर है। राहुकाल 11:39 से 13:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 17:03
रात 06:16 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:20 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 18:06 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 14:20 तक
कृष्ण द्वितीया 10:45, 26 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:06 तक
मृगशिरा 15:17, 26 नव॰ तक
योग
शिव 09:29 तक
सिद्ध 05:19, 26 नव॰ तक
साध्य 01:14, 27 नव॰ तक
करण
कौलव 14:20 तक
तैतिल 00:32, 26 नव॰ तक
गर 10:45, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:41, 26 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
17:03
चंद्रोदय
17:43
चंद्रास्त
07:02
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:01 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:39 – 13:00
यमगंड
07:37 – 08:58
गुलिक काल
10:18 – 11:39

25 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:16 – 07:37शुभ
अमृत07:37 – 08:58शुभ
काल08:58 – 10:18टालें
शुभ10:18 – 11:39शुभ
रोग11:39 – 13:00टालें
उद्वेग13:00 – 14:21टालें
चर14:21 – 15:42सामान्य
लाभ15:42 – 17:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:03 – 18:42टालें
शुभ18:42 – 20:22शुभ
अमृत20:22 – 22:01शुभ
चर22:01 – 23:40सामान्य
रोग23:40 – 01:19टालें
काल01:19 – 02:58टालें
लाभ02:58 – 04:37शुभ
उद्वेग04:37 – 06:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1607:10दिन
चंद्र07:1008:04दिन
शनि08:0408:58दिन
गुरु08:5809:51दिन
मंगल09:5110:45दिन
सूर्य10:4511:39दिन
शुक्र11:3912:33दिन
बुध12:3313:27दिन
चंद्र13:2714:21दिन
शनि14:2115:15दिन
गुरु15:1516:09दिन
मंगल16:0917:03दिन
सूर्य17:0318:09रात
शुक्र18:0919:15रात
बुध19:1520:22रात
चंद्र20:2221:28रात
शनि21:2822:34रात
गुरु22:3423:40रात
मंगल23:4000:46रात
सूर्य00:4601:52रात
शुक्र01:5202:58रात
बुध02:5804:04रात
चंद्र04:0405:10रात
शनि05:1006:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2328° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।