7 फ़रवरी 2027 को रियाद का पंचांग

रविवार, 7 फ़रवरी 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 7 फ़रवरी 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (20:57 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (21:19 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:42 पर है। राहुकाल 16:18 से 17:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:42
रात 06:31 तक
तिथि
प्रतिपदा, 20:57 तक
द्वितीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 21:19 तक
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:57 तक
शुक्ल द्वितीया 22:36, 8 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:27, 8 फ़र॰ तक
योग
वरीयान 19:11 तक
परिघअशुभ 19:21, 8 फ़र॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 07:59 तक
बव 20:57 तक
बालव 09:50, 8 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मकर 08:06 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:42
चंद्रोदय
06:53
चंद्रास्त
18:27
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
16:18 – 17:42
यमगंड
12:07 – 13:31
गुलिक काल
14:54 – 16:18

7 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:32 – 07:56टालें
चर07:56 – 09:19सामान्य
लाभ09:19 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:07शुभ
काल12:07 – 13:31टालें
शुभ13:31 – 14:54शुभ
रोग14:54 – 16:18टालें
उद्वेग16:18 – 17:42टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:42 – 19:18शुभ
अमृत19:18 – 20:54शुभ
चर20:54 – 22:30सामान्य
रोग22:30 – 00:07टालें
काल00:07 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:19शुभ
उद्वेग03:19 – 04:55टालें
शुभ04:55 – 06:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3207:28दिन
शुक्र07:2808:24दिन
बुध08:2409:19दिन
चंद्र09:1910:15दिन
शनि10:1511:11दिन
गुरु11:1112:07दिन
मंगल12:0713:03दिन
सूर्य13:0313:58दिन
शुक्र13:5814:54दिन
बुध14:5415:50दिन
चंद्र15:5016:46दिन
शनि16:4617:42दिन
गुरु17:4218:46रात
मंगल18:4619:50रात
सूर्य19:5020:54रात
शुक्र20:5421:58रात
बुध21:5823:02रात
चंद्र23:0200:07रात
शनि00:0701:11रात
गुरु01:1102:15रात
मंगल02:1503:19रात
सूर्य03:1904:23रात
शुक्र04:2305:27रात
बुध05:2706:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2356° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।