7 अप्रैल 2027 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 7 अप्रैल 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 7 अप्रैल 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (01:59, 8 अप्रैल तक), नक्षत्र रेवती (15:55 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 11:55 से 13:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 18:11
रात 05:38 तक
तिथि
प्रतिपदा, 01:59 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रेवती, 15:55 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 01:59, 8 अप्रैल तक
शुक्ल द्वितीया 00:40, 9 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 15:55 तक
अश्विनी 15:29, 8 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 03:06, 8 अप्रैल तक
विष्कंभअशुभ 00:55, 9 अप्रैल तक
करण
किंस्तुघ्न 14:28 तक
बव 01:59, 8 अप्रैल तक
बालव 13:22, 8 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 15:55 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
05:33
चंद्रास्त
18:45
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:20 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:55 – 13:29
यमगंड
07:13 – 08:47
गुलिक काल
10:21 – 11:55

7 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:39 – 07:13शुभ
अमृत07:13 – 08:47शुभ
काल08:47 – 10:21टालें
शुभ10:21 – 11:55शुभ
रोग11:55 – 13:29टालें
उद्वेग13:29 – 15:03टालें
चर15:03 – 16:37सामान्य
लाभ16:37 – 18:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:11 – 19:37टालें
शुभ19:37 – 21:03शुभ
अमृत21:03 – 22:29शुभ
चर22:29 – 23:55सामान्य
रोग23:55 – 01:20टालें
काल01:20 – 02:46टालें
लाभ02:46 – 04:12शुभ
उद्वेग04:12 – 05:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3906:42दिन
चंद्र06:4207:44दिन
शनि07:4408:47दिन
गुरु08:4709:50दिन
मंगल09:5010:52दिन
सूर्य10:5211:55दिन
शुक्र11:5512:58दिन
बुध12:5814:00दिन
चंद्र14:0015:03दिन
शनि15:0316:06दिन
गुरु16:0617:09दिन
मंगल17:0918:11दिन
सूर्य18:1119:08रात
शुक्र19:0820:06रात
बुध20:0621:03रात
चंद्र21:0322:00रात
शनि22:0022:57रात
गुरु22:5723:55रात
मंगल23:5500:52रात
सूर्य00:5201:49रात
शुक्र01:4902:46रात
बुध02:4603:43रात
चंद्र03:4304:41रात
शनि04:4105:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 मई 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 मई 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2379° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।