19 अप्रैल 2027 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 19 अप्रैल 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 19 अप्रैल 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (02:21, 20 अप्रैल तक), नक्षत्र हस्त (02:10, 20 अप्रैल तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 07:04 से 08:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 18:16
रात 05:27 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:21 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
हस्त, 02:10 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 02:21, 20 अप्रैल तक
पूर्णिमा 01:27, 21 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 02:10, 20 अप्रैल तक
चित्रा 01:58, 21 अप्रैल तक
योग
व्याघातअशुभ 17:14 तक
हर्षण 15:17, 20 अप्रैल तक
करण
गर 14:57 तक
वणिज 02:21, 20 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 13:51, 20 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
16:58
चंद्रास्त
04:07
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
07:04 – 08:40
यमगंड
10:16 – 11:52
गुलिक काल
13:28 – 15:04

19 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:28 – 07:04शुभ
काल07:04 – 08:40टालें
शुभ08:40 – 10:16शुभ
रोग10:16 – 11:52टालें
उद्वेग11:52 – 13:28टालें
चर13:28 – 15:04सामान्य
लाभ15:04 – 16:40शुभ
अमृत16:40 – 18:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:16 – 19:40सामान्य
रोग19:40 – 21:04टालें
काल21:04 – 22:28टालें
लाभ22:28 – 23:52शुभ
उद्वेग23:52 – 01:15टालें
शुभ01:15 – 02:39शुभ
अमृत02:39 – 04:03शुभ
चर04:03 – 05:27सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2806:32दिन
शनि06:3207:36दिन
गुरु07:3608:40दिन
मंगल08:4009:44दिन
सूर्य09:4410:48दिन
शुक्र10:4811:52दिन
बुध11:5212:56दिन
चंद्र12:5614:00दिन
शनि14:0015:04दिन
गुरु15:0416:08दिन
मंगल16:0817:12दिन
सूर्य17:1218:16दिन
शुक्र18:1619:12रात
बुध19:1220:08रात
चंद्र20:0821:04रात
शनि21:0422:00रात
गुरु22:0022:56रात
मंगल22:5623:52रात
सूर्य23:5200:47रात
शुक्र00:4701:43रात
बुध01:4302:39रात
चंद्र02:3903:35रात
शनि03:3504:31रात
गुरु04:3105:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 मई 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 मई 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या
9 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2384° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।