22 अप्रैल 2027 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 22 अप्रैल 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 22 अप्रैल 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (01:07, 23 अप्रैल तक), नक्षत्र विशाखा (03:02, 23 अप्रैल तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 13:28 से 15:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:18
रात 05:24 तक
तिथि
द्वितीया, 01:07 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा, 03:02 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 01:07, 23 अप्रैल तक
कृष्ण तृतीया 01:51, 24 अप्रैल तक
नक्षत्र
विशाखा 03:02, 23 अप्रैल तक
अनुराधा 04:27, 24 अप्रैल तक
योग
सिद्धि 12:27 तक
व्यतीपातअशुभ 11:43, 23 अप्रैल तक
करण
तैतिल 12:59 तक
गर 01:07, 23 अप्रैल तक
वणिज 13:24, 23 अप्रैल तक
चंद्र राशि
तुला 20:47 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
19:58
चंद्रास्त
06:00
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
13:28 – 15:05
यमगंड
05:25 – 07:02
गुलिक काल
08:38 – 10:15

22 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:25 – 07:02शुभ
रोग07:02 – 08:38टालें
उद्वेग08:38 – 10:15टालें
चर10:15 – 11:51सामान्य
लाभ11:51 – 13:28शुभ
अमृत13:28 – 15:05शुभ
काल15:05 – 16:41टालें
शुभ16:41 – 18:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:18 – 19:41शुभ
चर19:41 – 21:04सामान्य
रोग21:04 – 22:28टालें
काल22:28 – 23:51टालें
लाभ23:51 – 01:14शुभ
उद्वेग01:14 – 02:37टालें
शुभ02:37 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:24शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2506:29दिन
मंगल06:2907:34दिन
सूर्य07:3408:38दिन
शुक्र08:3809:43दिन
बुध09:4310:47दिन
चंद्र10:4711:51दिन
शनि11:5112:56दिन
गुरु12:5614:00दिन
मंगल14:0015:05दिन
सूर्य15:0516:09दिन
शुक्र16:0917:13दिन
बुध17:1318:18दिन
चंद्र18:1819:13रात
शनि19:1320:09रात
गुरु20:0921:04रात
मंगल21:0422:00रात
सूर्य22:0022:55रात
शुक्र22:5523:51रात
बुध23:5100:46रात
चंद्र00:4601:42रात
शनि01:4202:37रात
गुरु02:3703:33रात
मंगल03:3304:29रात
सूर्य04:2905:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 मई 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 मई 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या
9 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2385° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।