4 अक्टूबर 2027 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (23:06 तक), नक्षत्र अनुराधा (22:14 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 07:15 से 08:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:37
रात 05:46 तक
तिथि
पंचमी, 23:06 तक
षष्ठी
नक्षत्र
अनुराधा, 22:14 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 23:06 तक
शुक्ल षष्ठी 00:03, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 23:45, 5 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 09:55 तक
आयुष्मान 09:13, 5 अक्टू॰ तक
करण
बव 10:56 तक
बालव 23:06 तक
कौलव 11:29, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
09:59
चंद्रास्त
20:38
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:05

अशुभ समय

राहुकाल
07:15 – 08:43
यमगंड
10:12 – 11:41
गुलिक काल
13:10 – 14:39

4 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:46 – 07:15शुभ
काल07:15 – 08:43टालें
शुभ08:43 – 10:12शुभ
रोग10:12 – 11:41टालें
उद्वेग11:41 – 13:10टालें
चर13:10 – 14:39सामान्य
लाभ14:39 – 16:08शुभ
अमृत16:08 – 17:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:37 – 19:08सामान्य
रोग19:08 – 20:39टालें
काल20:39 – 22:10टालें
लाभ22:10 – 23:41शुभ
उद्वेग23:41 – 01:13टालें
शुभ01:13 – 02:44शुभ
अमृत02:44 – 04:15शुभ
चर04:15 – 05:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4606:45दिन
शनि06:4507:44दिन
गुरु07:4408:43दिन
मंगल08:4309:43दिन
सूर्य09:4310:42दिन
शुक्र10:4211:41दिन
बुध11:4112:41दिन
चंद्र12:4113:40दिन
शनि13:4014:39दिन
गुरु14:3915:38दिन
मंगल15:3816:38दिन
सूर्य16:3817:37दिन
शुक्र17:3718:38रात
बुध18:3819:38रात
चंद्र19:3820:39रात
शनि20:3921:40रात
गुरु21:4022:41रात
मंगल22:4123:41रात
सूर्य23:4100:42रात
शुक्र00:4201:43रात
बुध01:4302:44रात
चंद्र02:4403:45रात
शनि03:4504:45रात
गुरु04:4505:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2448° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।