17 जनवरी 2028 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 17 जनवरी 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 17 जनवरी 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (12:42 तक), नक्षत्र हस्त (03:49, 18 जन॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 08:00 से 09:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:26
रात 06:39 तक
तिथि
षष्ठी, 12:42 तक
सप्तमी
नक्षत्र
हस्त, 03:49 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 12:42 तक
कृष्ण सप्तमी 11:02, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 03:49, 18 जन॰ तक
चित्रा 03:13, 19 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 17:22 तक
सुकर्मा 14:53, 18 जन॰ तक
करण
वणिज 12:42 तक
विष्टि (भद्रा) 23:47 तक
बव 11:02, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
23:13
चंद्रास्त
10:13
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
08:00 – 09:21
यमगंड
10:42 – 12:03
गुलिक काल
13:24 – 14:44

17 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:39 – 08:00शुभ
काल08:00 – 09:21टालें
शुभ09:21 – 10:42शुभ
रोग10:42 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:24टालें
चर13:24 – 14:44सामान्य
लाभ14:44 – 16:05शुभ
अमृत16:05 – 17:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:26 – 19:05सामान्य
रोग19:05 – 20:44टालें
काल20:44 – 22:23टालें
लाभ22:23 – 00:03शुभ
उद्वेग00:03 – 01:42टालें
शुभ01:42 – 03:21शुभ
अमृत03:21 – 05:00शुभ
चर05:00 – 06:39सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3907:33दिन
शनि07:3308:27दिन
गुरु08:2709:21दिन
मंगल09:2110:15दिन
सूर्य10:1511:09दिन
शुक्र11:0912:03दिन
बुध12:0312:57दिन
चंद्र12:5713:51दिन
शनि13:5114:44दिन
गुरु14:4415:38दिन
मंगल15:3816:32दिन
सूर्य16:3217:26दिन
शुक्र17:2618:32रात
बुध18:3219:38रात
चंद्र19:3820:44रात
शनि20:4421:50रात
गुरु21:5022:57रात
मंगल22:5700:03रात
सूर्य00:0301:09रात
शुक्र01:0902:15रात
बुध02:1503:21रात
चंद्र03:2104:27रात
शनि04:2705:33रात
गुरु05:3306:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2488° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।