21 जनवरी 2028 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 21 जनवरी 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 21 जनवरी 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (09:47 तक), नक्षत्र अनुराधा (05:04, 22 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 10:42 से 12:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:29
रात 06:38 तक
तिथि
दशमी, 09:47 तक
एकादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 05:04 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 09:47 तक
कृष्ण एकादशी 10:34, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
अनुराधा 05:04, 22 जन॰ तक
ज्येष्ठा 06:48, 23 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 10:24 तक
वृद्धि 09:51, 22 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:47 तक
बव 22:06 तक
बालव 10:34, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
02:14
चंद्रास्त
12:58
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
10:42 – 12:04
यमगंड
14:47 – 16:08
गुलिक काल
08:00 – 09:21

21 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:38 – 08:00सामान्य
लाभ08:00 – 09:21शुभ
अमृत09:21 – 10:42शुभ
काल10:42 – 12:04टालें
शुभ12:04 – 13:25शुभ
रोग13:25 – 14:47टालें
उद्वेग14:47 – 16:08टालें
चर16:08 – 17:29सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:29 – 19:08टालें
काल19:08 – 20:47टालें
लाभ20:47 – 22:25शुभ
उद्वेग22:25 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:21शुभ
चर03:21 – 04:59सामान्य
रोग04:59 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3807:33दिन
बुध07:3308:27दिन
चंद्र08:2709:21दिन
शनि09:2110:15दिन
गुरु10:1511:10दिन
मंगल11:1012:04दिन
सूर्य12:0412:58दिन
शुक्र12:5813:52दिन
बुध13:5214:47दिन
चंद्र14:4715:41दिन
शनि15:4116:35दिन
गुरु16:3517:29दिन
मंगल17:2918:35रात
सूर्य18:3519:41रात
शुक्र19:4120:47रात
बुध20:4721:52रात
चंद्र21:5222:58रात
शनि22:5800:04रात
गुरु00:0401:09रात
मंगल01:0902:15रात
सूर्य02:1503:21रात
शुक्र03:2104:27रात
बुध04:2705:32रात
चंद्र05:3206:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2490° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।