31 मार्च 2028 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 31 मार्च 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 31 मार्च 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (12:05 तक), नक्षत्र रोहिणी (23:49 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 10:24 से 11:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 18:09
रात 05:44 तक
तिथि
पंचमी, 12:05 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रोहिणी, 23:49 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मार्च 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 12:05 तक
शुक्ल षष्ठी 11:44, 1 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:49 तक
मृगशिरा 23:53, 1 अप्रैल तक
योग
आयुष्मान 22:34 तक
सौभाग्य 21:00, 1 अप्रैल तक
करण
बालव 12:05 तक
कौलव 23:58 तक
तैतिल 11:44, 1 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
08:54
चंद्रास्त
23:08
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:24 – 11:57
यमगंड
15:03 – 16:36
गुलिक काल
07:18 – 08:51

31 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:45 – 07:18सामान्य
लाभ07:18 – 08:51शुभ
अमृत08:51 – 10:24शुभ
काल10:24 – 11:57टालें
शुभ11:57 – 13:30शुभ
रोग13:30 – 15:03टालें
उद्वेग15:03 – 16:36टालें
चर16:36 – 18:09सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:09 – 19:36टालें
काल19:36 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:29शुभ
उद्वेग22:29 – 23:56टालें
शुभ23:56 – 01:23शुभ
अमृत01:23 – 02:50शुभ
चर02:50 – 04:17सामान्य
रोग04:17 – 05:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4506:47दिन
बुध06:4707:49दिन
चंद्र07:4908:51दिन
शनि08:5109:53दिन
गुरु09:5310:55दिन
मंगल10:5511:57दिन
सूर्य11:5712:59दिन
शुक्र12:5914:01दिन
बुध14:0115:03दिन
चंद्र15:0316:05दिन
शनि16:0517:07दिन
गुरु17:0718:09दिन
मंगल18:0919:07रात
सूर्य19:0720:04रात
शुक्र20:0421:02रात
बुध21:0222:00रात
चंद्र22:0022:58रात
शनि22:5823:56रात
गुरु23:5600:54रात
मंगल00:5401:52रात
सूर्य01:5202:50रात
शुक्र02:5003:48रात
बुध03:4804:46रात
चंद्र04:4605:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
12 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2516° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।