16 सितंबर 2028 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 16 सितंबर 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 16 सितंबर 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (08:21 तक), नक्षत्र आश्लेषा (18:40 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 08:43 से 10:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:55
रात 05:40 तक
तिथि
त्रयोदशी, 05:00 तक
नक्षत्र
आश्लेषा, 18:40 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 सितंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:21 तक
कृष्ण त्रयोदशी 05:00, 17 सित॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 01:17, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 15:55, 17 सित॰ तक
योग
शिव 13:35 तक
सिद्ध 09:37, 17 सित॰ तक
करण
तैतिल 08:21 तक
गर 18:44 तक
वणिज 05:00, 17 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:10, 17 सित॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 18:40 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
02:49
चंद्रास्त
16:06
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
08:43 – 10:15
यमगंड
13:19 – 14:51
गुलिक काल
05:39 – 07:11

16 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:39 – 07:11टालें
शुभ07:11 – 08:43शुभ
रोग08:43 – 10:15टालें
उद्वेग10:15 – 11:47टालें
चर11:47 – 13:19सामान्य
लाभ13:19 – 14:51शुभ
अमृत14:51 – 16:23शुभ
काल16:23 – 17:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:55 – 19:23शुभ
उद्वेग19:23 – 20:51टालें
शुभ20:51 – 22:19शुभ
अमृत22:19 – 23:47शुभ
चर23:47 – 01:15सामान्य
रोग01:15 – 02:43टालें
काल02:43 – 04:11टालें
लाभ04:11 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3906:41दिन
गुरु06:4107:42दिन
मंगल07:4208:43दिन
सूर्य08:4309:44दिन
शुक्र09:4410:46दिन
बुध10:4611:47दिन
चंद्र11:4712:48दिन
शनि12:4813:50दिन
गुरु13:5014:51दिन
मंगल14:5115:52दिन
सूर्य15:5216:54दिन
शुक्र16:5417:55दिन
बुध17:5518:54रात
चंद्र18:5419:52रात
शनि19:5220:51रात
गुरु20:5121:50रात
मंगल21:5022:49रात
सूर्य22:4923:47रात
शुक्र23:4700:46रात
बुध00:4601:45रात
चंद्र01:4502:43रात
शनि02:4303:42रात
गुरु03:4204:41रात
मंगल04:4105:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2581° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।