18 अक्टूबर 2028 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 18 अक्टूबर 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 18 अक्टूबर 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (05:56 तक), नक्षत्र चित्रा (14:58 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 11:38 से 13:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:23
रात 05:53 तक
तिथि
प्रतिपदा, 02:31 तक
द्वितीया
नक्षत्र
चित्रा, 14:58 तक
स्वाति
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 05:56 तक
शुक्ल प्रतिपदा 02:31, 19 अक्टू॰ तक
शुक्ल द्वितीया 23:29, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 14:58 तक
स्वाति 12:28, 19 अक्टू॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 22:56 तक
प्रीति 19:13, 19 अक्टू॰ तक
करण
नाग 05:56 तक
किंस्तुघ्न 16:11 तक
बव 02:31, 19 अक्टू॰ तक
बालव 12:56, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
05:58
चंद्रास्त
17:23
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:01 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:38 – 13:04
यमगंड
07:19 – 08:45
गुलिक काल
10:11 – 11:38

18 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:52 – 07:19शुभ
अमृत07:19 – 08:45शुभ
काल08:45 – 10:11टालें
शुभ10:11 – 11:38शुभ
रोग11:38 – 13:04टालें
उद्वेग13:04 – 14:30टालें
चर14:30 – 15:57सामान्य
लाभ15:57 – 17:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:23 – 18:57टालें
शुभ18:57 – 20:30शुभ
अमृत20:30 – 22:04शुभ
चर22:04 – 23:38सामान्य
रोग23:38 – 01:12टालें
काल01:12 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 04:19शुभ
उद्वेग04:19 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5206:50दिन
चंद्र06:5007:47दिन
शनि07:4708:45दिन
गुरु08:4509:42दिन
मंगल09:4210:40दिन
सूर्य10:4011:38दिन
शुक्र11:3812:35दिन
बुध12:3513:33दिन
चंद्र13:3314:30दिन
शनि14:3015:28दिन
गुरु15:2816:25दिन
मंगल16:2517:23दिन
सूर्य17:2318:25रात
शुक्र18:2519:28रात
बुध19:2820:30रात
चंद्र20:3021:33रात
शनि21:3322:35रात
गुरु22:3523:38रात
मंगल23:3800:40रात
सूर्य00:4001:43रात
शुक्र01:4302:45रात
बुध02:4503:48रात
चंद्र03:4804:50रात
शनि04:5005:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2593° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।