30 अप्रैल 2029 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 30 अप्रैल 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (06:42 तक), नक्षत्र अनुराधा (17:56 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 06:56 से 08:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:22
रात 05:17 तक
तिथि
तृतीया, 03:57 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
अनुराधा, 17:56 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 06:42 तक
कृष्ण तृतीया 03:57, 1 मई तक
कृष्ण चतुर्थी 01:51, 2 मई तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 16:18, 1 मई तक
योग
वरीयान 13:23 तक
परिघअशुभ 10:12, 1 मई तक
करण
गर 06:42 तक
वणिज 17:15 तक
विष्टि (भद्रा) 03:57, 1 मई तक
बव 14:49, 1 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
20:49
चंद्रास्त
06:38
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
06:56 – 08:34
यमगंड
10:12 – 11:50
गुलिक काल
13:28 – 15:06

30 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:18 – 06:56शुभ
काल06:56 – 08:34टालें
शुभ08:34 – 10:12शुभ
रोग10:12 – 11:50टालें
उद्वेग11:50 – 13:28टालें
चर13:28 – 15:06सामान्य
लाभ15:06 – 16:44शुभ
अमृत16:44 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:22 – 19:44सामान्य
रोग19:44 – 21:06टालें
काल21:06 – 22:28टालें
लाभ22:28 – 23:50शुभ
उद्वेग23:50 – 01:12टालें
शुभ01:12 – 02:33शुभ
अमृत02:33 – 03:55शुभ
चर03:55 – 05:17सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1806:23दिन
शनि06:2307:29दिन
गुरु07:2908:34दिन
मंगल08:3409:39दिन
सूर्य09:3910:45दिन
शुक्र10:4511:50दिन
बुध11:5012:55दिन
चंद्र12:5514:01दिन
शनि14:0115:06दिन
गुरु15:0616:11दिन
मंगल16:1117:17दिन
सूर्य17:1718:22दिन
शुक्र18:2219:16रात
बुध19:1620:11रात
चंद्र20:1121:06रात
शनि21:0622:00रात
गुरु22:0022:55रात
मंगल22:5523:50रात
सूर्य23:5000:44रात
शुक्र00:4401:39रात
बुध01:3902:33रात
चंद्र02:3303:28रात
शनि03:2804:23रात
गुरु04:2305:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
14 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मई 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 मई 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 मई 2029वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2667° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।