6 सितंबर 2029 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 6 सितंबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 6 सितंबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (19:11 तक), नक्षत्र आश्लेषा (01:48, 7 सित॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 18:06 पर है। राहुकाल 13:25 से 14:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 18:06
रात 05:36 तक
तिथि
त्रयोदशी, 19:11 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 01:48 तक
मघा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 19:11 तक
कृष्ण चतुर्दशी 16:42, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 01:48, 7 सित॰ तक
मघा 23:55, 7 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 14:42 तक
शिव 11:41, 7 सित॰ तक
करण
गर 08:11 तक
वणिज 19:11 तक
विष्टि (भद्रा) 06:01, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 01:48, 7 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
18:06
चंद्रोदय
03:15
चंद्रास्त
16:30
दिनमान
12h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
13:25 – 14:58
यमगंड
05:36 – 07:09
गुलिक काल
08:43 – 10:17

6 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:36 – 07:09शुभ
रोग07:09 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:17टालें
चर10:17 – 11:51सामान्य
लाभ11:51 – 13:25शुभ
अमृत13:25 – 14:58शुभ
काल14:58 – 16:32टालें
शुभ16:32 – 18:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:06 – 19:32शुभ
चर19:32 – 20:58सामान्य
रोग20:58 – 22:25टालें
काल22:25 – 23:51टालें
लाभ23:51 – 01:17शुभ
उद्वेग01:17 – 02:43टालें
शुभ02:43 – 04:10शुभ
अमृत04:10 – 05:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3606:38दिन
मंगल06:3807:41दिन
सूर्य07:4108:43दिन
शुक्र08:4309:46दिन
बुध09:4610:48दिन
चंद्र10:4811:51दिन
शनि11:5112:53दिन
गुरु12:5313:56दिन
मंगल13:5614:58दिन
सूर्य14:5816:01दिन
शुक्र16:0117:03दिन
बुध17:0318:06दिन
चंद्र18:0619:03रात
शनि19:0320:01रात
गुरु20:0120:58रात
मंगल20:5821:56रात
सूर्य21:5622:53रात
शुक्र22:5323:51रात
बुध23:5100:48रात
चंद्र00:4801:46रात
शनि01:4602:43रात
गुरु02:4303:41रात
मंगल03:4104:38रात
सूर्य04:3805:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2717° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।